मासी बहुत ही परेशान थी .. मौसी ने बैग से कुछ ऐसा निकाला कि वह भौंचक रह गई ।
🌺----------🌺--------------🌺----------🌺
एक ....
अब आगे -----
डिब्बा निकाला उसमें अंग्रेजी में सिगरेट लिखा था ..एक सिगरेट निकाली और लाइटर से जलाई, दम भरने लगी । धीरे धीरे हवा में धुएं से भरे छल्ले उड़ रहे थे और मौसी की माथे पर शिकन ।
वह हरे भरे मैदान में बैठे थे । दूर से ऊटी की मनोरम पहाड़ियां दिख रहीं थीं ।
गिट्टू ने पहली बार नैना के सामने सिगरेट पी थी ।
गिट्टू बोली ,---" डॉल डोंट टेल टू योर मोम एंड डैड ..!"(अपने मां पिता को ना बताना )
उसने मौसी को इतनी बेबस कभी नहीं देखा ," ओके मासी नहीं बताऊंगी । बिलीव मी ..।"( मुझ पर विश्वास करो)
--"ओके !" गिट्टू बोली ।
कुछ समय बाद ---
गिट्टू और नैना वहां से पास झील में बोटिंग करने चल दिए ।
वहां पर उनकी मुलाकात फिर उन्ही डायरेक्टर कमल रॉय से हुई , गिट्टू के साथ नैना को देखकर बोले ,--" यह स्वीट गर्ल कौन है ? आपने मिलवाया नहीं ,अभी तक ..!"
गिट्टू की नाराजगी अभी कम नहीं हुई थी ।
बोली,--" ऐसे कैसे मिलवा सकती हूं .. पर, ठीक है चलिए ...Meet my young beautiful neice Naina ! ( मेरी खूबसूरत भतीजी नैना ) !"
कमल,--"ठीक है ! चलो बात खत्म करो !! अगर चाहो तो इनको दूसरी फिल्म दे सकता हूं । बहुत सुंदर है ,...लड़की है आपकी भतीजी..!अभी एक चाइल्ड आर्टिस्ट भी चाहिए .. क्यों तैयार हो वंदिता ?"
गिट्टू ___"जी ठीक है ,पहले जीजू और दी से इजाजत ले लूं । फिर बताऊंगी । फिल्हाल अभी स्कूल जाती है ।"
कमल,---"कल तक बता देना । एक वेब सीरीज भी तैयार है । लीडिंग रोल मिल जाएगा ।"
--"और ...मैं ??"गिट्टू के मन में प्रश्न कौंधा ।
--"आपको ले रहें हैं साइड करेक्टर !" डायरेक्टर कमल हंसते हुए बोला ।
गिट्टू के पैरों से जमीन खिसक गई । क्या उसको चंद टुकड़े भीख में मिल रहे थे ..! कहां गए उसके किरदार जो कभी दम भरते थे ,उसके व्यक्तित्व का ...!! शाम हो चली थी और उसके कैरियर की भी शायद । यही सच था । एक दम कड़वा ।
नैना को अपने पर विश्वास नहीं हुआ । वह इतनी सुंदर तो नहीं ,मासी जितनी तो, बिल्कुल भी नहीं ।
इस बार इतवार भी चला गया ।
गिट्टू ने नैना को घर छोड़ा और धीरे सै बोली ,--" बाय बेटा ! मम्मी से बात करूंगी तुम्हारे लिए । "
उसने धीरे से हर हिलाया ,--" धन्यवाद मासी मेरे साथ समय गुजारने के लिए । लव यू । गुड नाइट ।"
गिट्टू मुस्कराई और घर की राह चल पड़ी ...।
नैना को मौसी के लिए बहुत दुख था । वह ग्रेसी से बोल नहीं सकी । मौसी से वादा किया था । उसने कुछ नहीं कहा खाना खाया और कमरे में जाकर सो गई ।
नैना बचपने से बाहर आने लगी थी वह हर बात मां से भी नहीं बता सकती थी । मां की क्रिया - प्रतिक्रिया का असर घर में तूफान भी ला सकता था और रिश्तों में कड़वाहट भी ।
सभी व्यस्त थे ..नैना परीक्षा की तैयारी में ,ग्रेसी खाने व कीचन के कामों में ,श्रेय छोटी - मोटी नौकरी और गिट्टू नई फिल्म की खोज में ।
एक दिन गिट्टू का फोन आया ---
ग्रेसी ,--" हेलो... बोलो गिट्टू ?"
गिट्टू ,--" दी नैना को नई फिल्म में as a child artist (बाल पात्र ) लेना चाहते हैं । क्या आप इजाजत देंगीं. ...जीजू से भी सलाह ले लेना ..?"
ग्रेसी ,--" क्या बोल रही हो गिट्टू ..वह तो बहुत छोटी है अभी । "
गिट्टू--'अरे दी ..ये भी बहुत अच्छा करियर है । पैसा पीछे भागता है और फेम ,नाम चकाचौंध !! समझो ..!! ऐसा मौका दुबारा नहीं मिलेगा । पता है कितना स्ट्रगल होता है , और कंपटीशन. अलग..... ! एक दिन शोहरत कदम चूमेगी तो सब भूल जाओगी...।"
ग्रेसी --,"...अभी कैसे करेगी ..?? उसे वक्त पर स्कूल भी जाना है ,और पढ़ाई करनी है.. ।"
---" दी तुम भी ना ...खुश होना चाहिए कि, बेटी को इतनी बड़ी फिल्म का ऑफर आया है । करियर की ऎपॉरचुनिटी सब को मिलती है कहां है ? .. और अपनी नैना लकी है .. बड़े बड़े शो में कितनी हद तक पेरेंट्स बच्चों के हक के लिए लड़ जाते हैं ! और आप तो .....भोली हैं... ।"
ग्रेसी,--"चुप कर , शट अप .! जीजू मानेंगे क्या ? मुश्किल है बहुत ..।"
गिट्टू ,--"क्यों नहीं मानेंगे ..मैं हूं ना ! दी तुमको मालूम हैं जीजू को चार साल हो गए हैं और नौकरी भी पक्की नहीं कैसे कर पाओगी नैना का भविष्य निश्चित ??! सोच लेना अच्छी तरह.. ।"
कुछ दिनों तक बातें होती रही ..! आखिर फैसला हुआ रात को शूटिंग होगी और दिन में पढ़ाई भी चलेगी । परंतु ग्रेसी नैना के साथ हीं रहेंगी ।
नैना के दिन- रात व्यस्त हो रहे थे । एक तरफ पढाई तो दूसरी तरफ शूटिंग । दिन -रात मेहनत ..एक चमकता हुआ आसमां का सितारा बनना था । हर पल ग्रेसी और श्रेय उसके साथ थे ।
ग्रेसी सजग रहती थी .. हर तरह से मिलने वाले लोग और नैना दुनिया दारी से बिल्कुल अंजान..।
सिलसिला चलता रहा साल दर साल गुजर गए ----
गिट्टू को फिल्म औफर आने लगभग बंद हो चुके थे । नैना को अगली हिट बैनर की फिल्म मिलने वाली थी ..। गिट्टू कभी सहयोगी कलाकारों का छोटा मोटा किरदार निभा रही थी ,तो कभी मां तक के रोल निभा रही थी । ज्यादातर डायरेक्टर यही मानते थे कि,अब उसमें वह बात नहीं दिखती ।
एक साल बाद ...
एक दिन... नैना को शूटिंग के लिए कपड़े दिए गए ..।
जब नैना सबके सामने आई ..। हूटिंग होने लगी ..। ग्रेसी को अच्छा नहीं लगा , डायरेक्टर को भी झिड़क दिया ..।
ग्रेसी ,--", यह कौन सा फार्मूला है डायरेक्टर साहब जब फिल्म की कहानी स्क्रिप्ट अच्छी नहीं तो एक्ट्रेस को ऐसे कपड़े देकर कौन सी पब्लिसिटी पाना चाहते हैं आप ?!!"
डायरेक्टर मन ही मन जल भुन गया था । लेकिन, लीडिंग एक्ट्रेस के मां को उसे बहुत प्यार से समझाना पड़ा था ,--" ये क्या बात है मैम ...अभी यह फिल्म की डिमांड है ना आगे ध्यान देंगे जरूर ।"
डायरेक्टर कमल को अच्छा नहीं लगता कि ग्रेसी हर बात में अपनी बात रखे । उनको ग्रेसी बर्दास्त नहीं हो रही थी ।
एक दिन उसने गिट्टू को साफ शब्दों में चेता दिया दिया यदि ,'मां बीच में आएगी तो हम उसे लीड रोल से उसे हटा देंगे ..।'
गिट्टू ने ग्रेसी को समझाने का यत्न किया परंतु ग्रेसी अपनी बात में अडिग रही । यदि फिल्म में दम है तो स्त्री को शो पीस क्यों बनाते हैं ? प्रश्न जायज !! फिल्म में दर्शक जुटाने के लिए हर तरह से प्रयोग लाए जाते हैं जिसे " हथकंडा " कहते हैं । दर्शक कहानी , किरदार या सुंदर एक्ट्रेस किसके मोह से बंधता है ....? हिट होने के लिए किस हद तक जा सकते हैं ..?
नैना ने केवल अभी बारहवीं कक्षा पास की थी ..। ग्रेसी पढ़ाने से कभी नहीं चूकी ,चाहे कैसा भी समय आया वह नैना की फाइल सम्मिट करनी हो या विद्यालय का काम समय पर होता रहा ।
वक्त ऐसा बदलाव ला रहा था जिसकी रूपरेखा बन रही थी धीरे -धीरे..।
उन्मुक्तता के अंधे नशे में नजर अंदाज करते हैं ..भला बुरा । गिट्टू के लिए कुछ ऐसा सबब लाने वाली थी जहां उसको नैना का सहारा लेना था ..।
गिट्टू को मानसिक तनाव / डिप्रेशन ने घेर लिया था । वह नशा करने लगी थी । नैना को मौसी का इस तरह से टूटना बिखरना अंदर तक हिला गया । बहुत बार समझाया परंतु गिट्टू की प्यारी मौसी अब बदल रही थी ...
वह गुस्से में रहती , झगड़ा भी करने लगी थी ..। नशे करके सारे -सारे दिन कमरे में पड़ी रहती थी । सुध बुध खोए ।
नैना ने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि, जिसको उसने अपने हृदय में महसूस किया है एक मां....सी तरह सोचा था ,वह इतनी बदल जाएगी ..।
बहुत दिनों से गिट्टू फोन नहीं कर रही थी ..ना ही उठा ही रही थी ..।
उसकी आंखों से ख्वाबों के नीड़ टूटने की आवाज तो नहीं आ रही थी ...पर महसूस हो रहा था कुछ खत्म होने जा रहा है या सभी ..??
फिर कुछ ऐसा हुआ ....।।
खबर की सुर्खियों में ....ऐसा देखा कि, उथल- पुथल मच गया ...!
सुनंदा ☺️
🌺-----------🌺-------------🌺------------🌺
क्रमशः

0 टिप्पणियाँ