अथाह जलराशि ,जहाजों का आना जाना,कभी भी बंदरगाह खाली नहीं रहते।

जूली को बड़े बड़े जहाज निहारना बहुत सुकून देता था,वह बचपन से ही बड़े जहाज में बैठना चाहती थी,देश दुनिया देखना चाहती थी।

मछुआरे की बेटी होने के कारण छोटे नावों में तो जा सकती थी,लेकिन बड़े जहाज में सात समुंदर पार कर दुनिया कैसे देखती।

कभी कभी मौसम खराब होता ,तो ऊंची ऊंची  लहरें, बड़े बड़े जहाज डुबो देती ।उसके बाबा भी मछली नहीं पकड़ने  जा पाते और उन्हें फल खा कर सोना पड़ता।

वह अपनी बहन जेनी ,मां और बाबा के साथ रहती थी।
उसकी बड़ी बहन सुंदर नहीं थी ,उसे कोई पसंद भी नहीं करता था।
दोनों बड़ी हो गई थी ।रिश्ते आते लेकिन जूली के जेनी के नहीं।
जेनी मन ही मन कुंठित रहती ,वह जूली से जलने लगी।

जलन का मीटर रोजाना बढ़ता ही जाता।
एक दिन जूली समुद्र किनारे खड़ी थी।अचानक पीछे से उसे  किसी ने डरा दिया ।जब मुड़ कर देखा तो सफेद कपड़े पहने एक सजीला नौजवान उसके पीछे था ।

उसने कहा _हैलो ,मैं सेकंड ऑफिस ,(मर्चेंट नेवी का)  मनीष ।तुम्हें, हमेशा जब भी यहां शिप पर आता हूं तो  खड़े पाता हूं ।
क्या तुम्हें शिप बहुत पसंद हैं?_मनीष ने जूली से पूछा।

जूली बहुत उत्साहित थी,और सेकंड ऑफिसर की बातों में  उसे रस भी आ रहा था।अभी तक उसने कभी ऐसा सुंदर ,सजीला नौजवान नही देखा था।उसके आसपास तो सब मछुआरे रहते थे,जिनसे मच्छी की ही बास आती थी।

उसकी मन के तार बज रहे थे।
तब तक मनीष ने पूछा _तुम्हारा नाम क्या है??

जूली ने हंस कर कहा _ मैं जूली हूं।
देर हो रही थी मनीष को ,जहाज के डेक से कैप्टन बुला रहा था।

मनीष का जहाज  इस समय भारत में था।मालवाहक जहाज होने के कारण लैंडिंग काफी दिनों की होती है,और फिर जहाज निकल जाता है ,दुनिया के किसी भी देश ।6,6 महीने उसी शिप में उनकी दुनिया होती है ।कभी कभी डाकुओं का खतरा।
काफी चुनौतियों से भरा होता है उनका सफर।

जूली और मनीष की रोजाना मुलाकातें होने लगीं।
वे एक दूसरे को पसंद करने लगे। मनीष जूली के घर भी उसके बाबा और मां से मिल चुका था।जेनी  ने  जब से मनीष को देखा था ,मन ही मन चाहने लगी थी और उसके पास आने का बहाना खोजती थी।

एक दिन मनीष ने जूली के मां , बाबा को कहा _बाबा अगर आप बुरा न माने तो मेरा शिप अगले महीने यहां से निकल जाएगा ,और उसके बाद मैं फिर 6महीने बाद ही आ पाऊंगा।अगर आप चाहे तो हमारा विवाह करवा दें।

जूली के मां ,बाबा ने चर्च में दोनो की शादी करवा दी।

फिर जूली को मनीष अपने घर ले गया।आलीशान घर ,लेकिन कोई नहीं रहता था।एक बस्ती से कामवाली आती थी ,वही घर की साफ सफाई ,और मनीष का खाना बनाती थी।

दोनों खुश थे,उन्होंने हर दिन को ,एक एक पल को खूब जिया।
जूली ने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि इतना चाहने वाला पति उसे मिलेगा।

मनीष चला गया। और यहां जूली रह गई बिल्कुल अकेली।


6महीने बाद..........

मनीष का जहाज लौट रहा था ।मनीष जूली के ख्यालों में खोया था ।विरह में बीते दिन ,दिन गिन गिन कर ही काटे थे।

अचानक बादल घिर आए,तेज हवाएं चलने लगी ,लहरें तेज तेज उठने लगीं।लगता जैसे सबकुछ खत्म हो जाएगा ,लहरें सब निगल जाएंगी।

मनीष एक पल के लिए डर गया ,क्या जूली और मैं अब कभी नहीं मिल पाएंगे।
समुद्र का पानी  डेक तक आ गया था।कुछ पानी उसके सूटकेस में भी भर गया।

कुछ देर बाद हवाएं शांत हो गई ,सबकुछ पूर्ववत हो गया ,जैसे कुछ हुआ ही न हो।

लेकिन क्या ये तूफान के आने के पहले की शांति थी ,क्या कुछ उथलपुथल होने वाला था जूली और मनीष के  जीवन में।

जानने के लिए पढ़िए इसका दूसरा भाग।