वो बारिश की टोली, वो सबके संग हँसी ठिठोली l
वो चूरन की पुड़िया,वो शक्कर की खट्टी मीठी गोली l
काश फ़िर लौट आए, वो बचपन की लड़की भोली l 

वो मम्मी की मार, वो सबसे बचाकर पापा का दुलार l
वो दादी से खिटपिट,वो छत पर घंटो सहेली से गिटपिट l 
काश फ़िर लौट आए , वो बचपन की लड़की सलोनी l

वो परीक्षा का डर, वो गर्मी में छत पर बिस्तर बिछाना l 
धागे के ऊपर माँजा लगाना,वो भैया के संग पतंग उड़ाना l 
काश फ़िर लौट आए, वो खुलकर हँसना और मुस्कराना l

वो जीजा,फ़ूफ़ा का आना,वो सबका पिकनिक पर जाना l वो पैसे बचाना,सुबह नत्थू मिठया के समोसे जलेबी लाना 
काश फ़िर लौट आए,सबके साथ मिलकर हुड़दंग मचाना 

वो पापा के संग मंदिर में जाना, वो नदी में डुबकी लगाना 
वो यज्ञ कीर्तन मैं जाना,वो झुनझुना बजाना, नारे लगाना l
काश लौट आए,वो पापा का सोते हुए मुझे गोदी में उठाना 

वो गीले अचार खाना और वो उनकी गुठलियाँ सुखाना l 
कहानी सुनाना,वो सावन में पापा का मुझे मेंहदी लगाना l
काश फ़िर लौट आए, वो गुड्डे गुड़िया की शादी रचाना l 

शुरू तो होती है पर खत्म न होती,ये यादें कभी पुरानी l
ये बचपन की दुनिया,किस्से कहानी और यादें सुहानी l 
सँजोकर रखूँगी , मन के कोने में ये अनमोल पूँजी l 
बनकर रहूँगी हमेशा, मैं अपने मम्मी पापा की बेटी l

शालिनी गुप्ता प्रेमकमल🌸
(स्वरचित)