पारबती लीजे गनेस जी को कनिया। 
जबहीं घनेरा को भूखा  लगत है जेबना जिमाबें महादेव की रनियां।
जबहीं गनेसा को प्यासा लगत है गडुवा घुटावें महादेव की रनियां।। 
जबहीं गनेसा को तलबा लगत है बीरा रचाबें महादेव की रनियां।
जबहीं गनेसा को नींदा लगत है सेजिया सजाबें महादेव की रनियां।। 

स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार युक्त डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर