लोगो कि नज़रे उस खचाखच भरे हॉल में जहां रोशनी की गई थी, आनंद पर टिक गई।
अपनी भावनाओं को काबू करता आनंद,स्टेज तक पहुंचा।
यह अवॉर्ड उसके लंबे संघर्ष के उपरांत कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से प्राप्त हो रहा था।
सेना के जवान के रूप में उसने देश कि सेवा 15 सालों तक की।
सेवानिवृत्ति के बाद गांव लौटा तो ,भाईयो ने उसकी जमीन कब्जे में कर रखी थी।
काफी पंचायत ,कोर्ट कचहरी दौड़ने के बाद,किसी तरह तीन बीघा बंजर जमीन मिली।
आनंद मायूस था,पर निराश नहीं। सेना का जवान होने के कारण उसने हार मानना नहीं सीखा था।
उसने बंजर जमीन को ही उपजाऊ बनाने का बीड़ा उठाया।
बंजर जमीन क्षारीय होती उसका pH 10 तक होता है।उसने घर के सब्जी ,कचरे को इकट्ठा कर खाद बनाना शुरू किया,गलने के बाद घरेलू वेस्ट अम्लीय हो जाता है ,उसे मिट्टी में मिलने के बाद ph 7 हो जाता है।
नेशनल सेंटर फॉर ऑर्गेनिक फार्मिंग जाकर भी सलाह ली।
आखिरकार मेहनत रंग लाई ।जो ग्रामीण और भाई उसपर हंसते थे ,वे दांतों तले अंगुली दबाने लगे।
उसने कृषि अनुसंधान केंद्र द्वारा बताए टिशू कल्चर केले का रोपण किया।
सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन का प्रबंध किया। केले की फसल खूब हुई।
उसका केला मंडी तक पहुंचने लगा , उसने स्टेकिंग विधि से टमाटर भी लगाया और खूब मुनाफा कमाया।
अब वो सफल किसान था ।उसी के लिए उसे महिंद्रा समृद्धि भारत कृषि अवॉर्ड से नवाजा गया था।
उसने देश के लिए अपने दोनो फ़र्ज़ पूरे किए।
"जय जवान और जय किसान "का नारा पूरा चरितार्थ किया।

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