बहुत चंचल मासूम सी होती हैं बेटियां,
बात-बात पर रोती नाजुक सा दिल रखती है बेटियां....।

घर में रौनक रहता है जब मुस्कुराती है बेटियां,
घर लगता है सूना-सूना कितना रुला जाती हैं बेटियां.....।

माता-पिता के जीवन में ठंडे पानी के छींटे सी होती है बेटियां,
विषमता को सरलता में बदल देती है बेटियां......।

परिवार का भावनात्मक समर्थन प्रणाली होती है बेटियां,
घर की नई इबारत लिखती है बेटियां.......।

गर्व से जीना सिखाती है बेटियां,
दो परिवार के भरोसे की इमारत की नींव होती है बेटियां..।
      (सभी बेटियों को समर्पित)     ऋचा कर्ण,✍✍✍