मैं कितना भी चाहु तेरे ख्यालों से दूर रहने की
तू उतना ही मुझमे महसूस होता है
खोयी हूँ कुछ इस तरह तेरे प्यार के दुनिया में
मेरी हर धड़कन में भी सिर्फ तू होता है
क्या असर हुआ है तेरे चाहत का भी दिल पे
तू दूर होकर भी मेरे हर पल साथ लगता है
सबके होते हुए भी मैं किसीकी न रही
मेरी हर धड़कन में भी सिर्फ तू होता है
कहने को रहती हूँ अपनों के महफिल में
पर इस दिल को हर पल तन्हा तन्हा लगता है
ढूंढती है निगाहें हर तरफ तुझे ही हमराही
मेरी हर धड़कन में भी सिर्फ तू होता है
अपनों की ख़ुशी के दुवाएँ माँगा करती थीं कभी
अब तेरे सिवा कोई नाम आता नहीं लबों पे दुवाओ में
छाया है तू इस तरह मेरे दिल पे ओ सनम
की मेरी हर धड़कन में भी सिर्फ तू होता है
तुझसे मिलने से पहले कभी ऐसा न लगा दिल को
मिलकर तुमसे बहुत ख़ास महसूस करती हूँ खुद को
कुछ तो बात होंगी मुझमे भी नैना या खुशकिस्मत कहु
की इस दुनिया के भीड़ में तुमने मुझे ही चुना है.....!!
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नैना.... ✍️

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