बहुत तपस्या की थी प्रिया ने अपने मुकाम को हासिल करने के लिए।
आज प्रिया ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा पास की ।उसने सिविल सेवा में अच्छी रैंक पाई थी।
सिर्फ एक वाक्य ने उसके जिंदगी की दिशा बदल दी थी।
वह छोटी थी ,करीब 9 साल की ।मां के साथ बस से कहीं जा रही थी ।बस भरी हुई थी,जिस स्टॉप पर वे बस पर चढ़ी थी।वहां खाने पीने के लिए बस कुछ देर के लिए रुकती थी। एक सीट खाली देख उसकी मां उसपर बैठ गई।बस चलने को हुई,तो जो जो यात्री नीचे गए थे ,वे अपनी अपनी सीट देख कर बैठने लगे।
प्रिया की मां जिस सीट पर बैठी थी ,उस सीट पर एक महिला पहले बैठी थी,थोड़ी देर के लिए बस से उतर नीचे गई थी ।आते ही उसने कहा _मेरी सीट से उठो।
प्रिया की मां ने कहा_ बहन जी बस आगे के स्टॉप पर उतर जाऊंगी।
वह महिला चिल्लाने लगी ,डर से उसकी मां उठ गई ।उस महिला का गुस्सा कम ही नहीं हो रहा था ,वह बैठ कर भी उटपटांग बोल रही थी ।उसने कहा बड़ी कलक्टर बनी फिर रही है ,जहां मन किया बैठ गई।
कलक्टर ये क्या होता है ??_नन्ही प्रिया के दिमाग में ये शब्द बार बार आ रहे थे।आखिर अपने स्टॉप पर उतर जाने अपनी मां से पूछा मां ये कलेक्टर क्या होता है।वो महिला क्यों ऐसा बोल रही थी।
प्रिया की मां ने कहा बेटी कलक्टर बहुत बड़ा अफसर होता है ,उसके पास बहुत सारी सुख सुविधाएं होती हैं।
अच्छा ,मां मैं भी कलक्टर बनूंगी ।
हां हां ,बन जाना _शांति देवी ने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा।
शांति देवी ने सोचा था_ बचपन में बच्चों को जो जो किरदार अच्छा लगता है , वे वैसा ही बनना चाहते हैं ,लेकिन बाद में वह भूत उतर जाता है।
लेकिन प्रिया के साथ ऐसा नहीं हुआ ,वह घटना उसे भूलती नहीं थी ,मां का अपमान कलक्टर बनने के उसके लक्ष्य को और मजबूत बना रहा था।
उसने अपने इस मुकाम को हासिल करने के लिए कड़ी तपस्या की।अपने एकेडमिक रिकॉर्ड में प्रथम स्थान के अलावा दूसरे स्थान की आने नहीं दिया।स्कॉलरशिप मिलने के कारण उसकी शिक्षा में कभी अड़चन नहीं आई ,उसके दोस्त बहुत कम थे,शादी विवाह ,रिश्तेदार सब छूट गए थे।वे सब नाराज होते और ताना देते ,देखो कब ये भूत उतरता है ,और शांति को हमारी जरूरत पड़ती है ,आखिर बेटी के विवाह में तो आयेगी हमसे मदद लेने।
आज सबका मुंह खुल रहा था ,तो सिर्फ प्रसंशा के लिए ,आलोचना के लिए न अब कोई शब्द थे न कारण ।
प्रेरणा_अपने आलोचकों का मुंह आप अपने काम के प्रति ईमानदारी और लक्ष्य को प्राप्त कर बंद कर सकते हैं।
कभी कभी किसी के अनायास मुंह से निकले शब्द आपको बड़े लक्ष्य का पीछा करने में मदद करते हैं

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