अगले दिन सुबह जब शैव्या जिम पहुंची तो ,वहां उसने राकेश को भी कुछ एक्सरसाइज करते पाया।
अरे आप ? वह राकेश को देख चौंक गई।

हां आज ही सर ने ज्वाइन किया है ,पूरे साल की मेंबरशिप ली है सर ने _जिम संचालक शैव्या की तरफ देखता हुआ बोला।

हुंह ,मुस्कुराती शैव्या आगे बढ़ी ,
और इंस्ट्रक्टर के  द्वारा बताए एक्सरसाइज करने लगी।
राकेश को एक्सरसाइज की कोई जरूरत नहीं थी ,वह तो सिर्फ शैव्या से मिलने और उसे देखने के संवरण के कारण खिंचा चला आया था।

थोड़ी देर में वह पानी पीने के बहाने  बैठ गया ,और फिर बाहर आ गया। शैव्या ने  भी आज सिर्फ आधा घंटा ही एक्सरसाइज किया ।

फिर वह भी बाहर निकल गई ,सामने ही पार्क था ,शहरों की जिंदगी ....रात भर लोग काम करते हैं ,बमुश्किल ही सुबह की शुद्ध हवा में निकल पाते हैं।

सैर करने वालों की ज्यादा भीड़ नहीं थी ,कुछ बुजुर्ग ही पार्क में मौजूद थे।
राकेश शैव्या से सटकर बैठ गया ,एक दम करीब।इतनी की एक दूसरे की दिल की धड़कनें सुनाई पड़ रही थीं।
थोड़ी देर बाद राकेश ने शैव्या का हाथ अपने हाथों में लेकर चूम लिया।
शैव्या ने कोई विरोध नहीं किया ।अब राकेश की हिम्मत बढ़ चुकी थी ,शैव्या के निकट होने के कारण उसके  तन बदन में झुरझुरी हो रही थी।
शैव्या सब समझ रही थी ,फिर वह तेजी से चलने के लिए उठी ।राकेश बोलता रहा ,अभी न जाओ ना ,थोड़ी देर और बैठ लो।

शैव्या ने अपना समय बदल दिया ,वह  देर से आने लगी ।
राकेश को समझ में नहीं आ रहा था ,क्यों शैव्या ऐसा व्यवहार कर रही ।
उसने मैसेज किया_नाराज हो ?
शैव्या का जवाब _नहीं।
क्यों मिलती भी  नहीं,और टाइम भी बदल दिया _राकेश ने कहा।
ऐसे ही_शैव्या का जवाब था।

सोमवार को रचित की फ्लाइट थी ,रचित के जाने के बाद शैव्या एक दम फ्री हो गई।

अब तो कोई रोक टोक थी नहीं,खाना बनाने वाले को उसके 15 दिन की छुट्टी दे दी ,वो भी अपने गांव चला गया।झाड़ू ,बर्तन वाली समय से आती फिर चली जाती ,पूरा दिन रात खाली था।

उसने राकेश को फोन किया ।
राकेश ने फोन उठाया _हैलो,आज कैसे मेरी याद आ गई ।
अरे आप इतने गुस्सा हैं,मैने सोचा नहीं था_शैव्या ने हंस कर कहा।
और नहीं तो क्या ?अब राकेश का स्वर कुछ नरम पड़ा ,तुम्हारी बेरुखी मुझे अंदर से तोड़ती है ,जब मन किया बात करती हो ,जब मन करता है नहीं करती ।

अच्छा बाबा ,बहुत कर लिया गुस्सा ,आज शाम क्या कर रहे हैं?_शैव्या ने बड़ी अदा से पूछा।

क्या करूंगा ?क्लिनिक बंद कर ,घर जाकर तन्हाइयों में तारे गिन गिन रात काटूंगा।
अभी तक तो वही करता आ रहा हूं।जब तुमसे इस बार मिला तो कितने सोए अरमान फिर से जागे थे कि
वो जो तुमसे पहले न कह पाया ,वो इस बार कह ही दूंगा,लेकिन क्या हुआ मिली भी तो अब 
तुम मुझसे दूर दूर छिटकती रहती हो_राकेश का लहजा शिकायती और रूखा था।


सुनिए न आज  रात 8 बजे तक आ जाइए ,खूब सारी बातें करेंगे ,और आप अपनी शिकायतें ,अरमान सब पूरा कर लीजिएगा_शैव्या का बोलने का अंदाज राकेश के मन में कई तार छेड़ गया।

आज दोनों का ही मन नहीं लग रहा था।
क्लिनिक में  राकेश का ज्यादा ध्यान पेशेंट पर नहीं था।
ज्यादातर क्लाइंट्स उसने अपने अटेंडेंट पर ही रख छोड़ा था।
अब स्टाफ में भी खुसर फुसर शुरू हो गई थी,पता नहीं आज डॉक्टर साहब का मन काम में नही लगता।

नीरज (जो पानी लेकर अंदर गया था जिस दिन शैव्या आई थी),और उसका असिस्टेंट राघव,गार्ड  ,सबने एक सुर में कहा ये प्रेम का मामला लगता है भाई,अपने डॉक्टर साहब को प्रेम रोग लगा है।

फिर नीरज ने कहा _मुझे तो लगता है ,वही मैडम हैं जो उस दिन आई थीं।

राघव  ने कहा_तुम कैसे दावे के साथ कह सकते हो,वो तो शादी शुदा लग रही थी।

गार्ड जो सबसे ज्यादा उम्र का था ,भद्दी हंसी हंसते हुए बोला,इन रईस घरों की औरतों को पराए मर्द ज्यादा भाते हैं ,पति समय कम देते हैं तो अपनी जरूरत ये कहीं और पूरी करती हैं।

सबने हामी भरी ।
इधर शैव्या जसोदा के साथ मिलकर घर को खूब करीने से सजाने में लगी थी।
जसोदा को आश्चर्य हो रहा था, कि अचानक घर के काम में इतनी दिलचस्पी कैसे होने लगी मालकिन को?
खैर वो अपना काम निपटा कर चली गई ,आज शैब्या किचन में बहुत समय बाद कुछ बनाने गई ,वरना तो पानी गर्म करने के अलावा कुछ नहीं।
उसने अपनी मनपसंद कमल गट्टे की सब्जी , दाल ,चावल बनाई ।

उसके बाद उसने रचित से वीडियो चैटिंग की ,रचित यूरोप की खूबसूरती दिखा रहा था।

अपने सास ससुर को भी फोन लगाकर उनका हाल चाल लिया।
ये सब उसको राकेश के आने के बाद बाधा दे सकते थे,इसलिए सबसे बात करने के बाद ,अब और फोन आने की उम्मीद नहीं थी।

शाम को राकेश घर  वापस लौटा  ,आज वो ऐसे खुशी से झूम रहा था ,जैसे किसी ने मदिरा पिला दी हो।

शाम की चाय , शैव्या ने पी,फिर डिनर के लिए सब इंतजाम कर लिया,आज उसे खुद ही नहीं समझ आ रहा था कि वह इतनी एक्टिव कैसे है ,खाना बनाने के मामले में।

उसने सोच कर रखा था कि राकेश के आने से पहले वो सारा खाना रेडी कर लेगी ,ताकि एक पल भी उसके पास से दूर न हो।

अभी 8 बजने में 5 मिनट बाकी थे ,कॉलबेल बजी,शैव्या ने दौड़ कर दरवाजा खोला ,सामने राकेश खड़ा था। मेंस परफ्यूम की महक उसके नथुनों में समा गई ।

क्रमशः