तुम एक अजनबी ही थे मेरे लिए
और मैं भी थीं अनजानी सी तुम्हारे लिए
जाने कैसे जुड़ गया रिश्ता यूँ तेरा मेरा
की अब मुश्किल है जीना बिना एक दूजे के
याद है तुम्हे वो हर रोज़ तुम्हारा मैसेज करना
और मेरा हर बार तुम्हे जानबूझ कर इग्नोर करना
नहीं पता था दिल को की कुछ ऐसा होजायेगा
की अब मुश्किल है जीना बिना एक दूजे के
क्या आलम थीं वो लम्हे भी ज़िन्दगी का
जो देर देर तक हम चैटिंग करने लगे
बहुत समझाया इस दिल को पर नहीं माना कहाँ मेरा
की अब मुश्किल है जीना बिना एक दूजे के
क्या खूब लगी है तुमसे ओ शहज़ादे मेरे
लगता नहीं कभी हमारे बिच टकरार भी होती थीं
जाने कब वो हर टकरार मोहब्बत बन गयीं ज़िन्दगी के
की अब बहुत मुश्किल है जीना बिना एक दूजे के
वक़्त जैसा भी हो तुम्हारा साथ निभाना है
गम हो या खुशी मुझे साथ तेरे मुस्कुराना है
दिन,महीने या साल की बात ही दूर है सनम मेरे
अब तो नैना केलिए एक पल भी मुश्किल होने लगा जीना बिन तेरे
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नैना... ✍️💓
काल्पनिक.... ✍️

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