मौन में छिपा हुआ विश्वास हो तुम
विचारों की विचारशीलता का विस्तार हो तुम ।
साकार हो तुम निराकार हो तुम
इंतजार की प्रत्येक हद का सरोकार हो तुम
जिन्हें कभी भुलाया ना जा सके
उन स्मृतियों का आधार हो तुम ।
क्या नहीं हो और क्या हो के बीच में जो अंतर है
उस अंतर का समानांतर हो तुम
लगन हो ,भक्ति हो, समय की हर शक्ति हो
मेरी पूजा हो, मेरी तपस्या हो तुम ।
हे प्रभु इस संसार के विनाशक भी तुम
और इस संसार के पालनहार भी हो तुम ।।
कविता गौतम ✍️

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