वाह! क्या खेल है हार-जीत की?
एक सेकेंड में जीत मिले...
कहीं अगर पिछे छूट गये तो,
एक सकेंड से हार मिले....
वाह! क्या खेल है......

ना मौज को दोहराओ अब,
मैराथन की सिढ़ी पार करो...
कहीं परिश्रम में चूक हुई तो?
फिर असफ़लता की आश करो...
वाह! क्या खेल है......

देखा हूँ! हारते हुए लोगों को,
किस्मत को कोसते हुए...
क्या गलती से चूक हो गई,
सोचो और विचार करो...
वाह! क्या खेल है......

हिम्मत करो! दहाड़ो तूम,
वादा करो खुद से...मैं जीतूँगा..
आश लगी है सबको तुझसे,
इतिहास बनाकर लौटूँगा...
वाह! क्या खेल है......


       ✍️ विकास कुमार लाभ
                मधुबनी(बिहार)