पूर्वजों के पुण्य का मिलता हमें ही प्रतिदान है।
पित्र पक्ष में ही उन्हें क्यों याद हम करें प्रतिदिन हम उनका सम्मान करें।।
जीते जी उनकी सारी इच्छाएं हम पूरी करें।
याद में हम वृक्ष लगाएं प्याऊ संचालित करें।।
नाम से खोले उनके छात्र वृत्ति बांटे पुस्तकें भरे फीस।
जीते जी अंगदान मरने पर देहदान दधीचि के अनुयायी बने।।
हम हैं भारत मां की संतान पूर्वजों के दिखाएं मार्ग पर चलकर।
नए विश्व के निर्माण में सहयोग हम करें।
हिलसा और अत्याचार को मिटाकर मानवता का विस्तार करें।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉक्टर आशा श्रीवास्तव जबलपुर

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