तीनों लोकों के स्वामी, गजानन गजानन,
कैसे लौट रहे हो, देवलोक गजानन,
ये तो है कर्म भूमि, देव लोक से पधारे,
कारज सिद्ध करने, तुम आए गजानन,
देवों के देवाधिदेव, सबके बिगड़े काम सवांरो,
वरद हस्त अपना, बनाए रखना हमेशा,
रुप धर आए माटी का, काया है माटी की,
ये काया तो सबकी, माटी में है मिल जाती,
पूजन अर्चन सब करते, हाथ जोड़ नमन करते,
करते सब वंदन, शीष नवाते अपना,
आत्मा तो कहते, अजर अमर है सबकी,
फिर क्यों बिदाई की बेला में, अश्रु भर आते,
कैसी बिदाई आपकी, साथ हो आप हमेशा,
आशीष आपका, हम पर बना रहे हमेशा,
संकट हरण हो देवा, देश पर आए जो संकट,
क्षण में दूर करना, देवाधिपति देवा ।
काव्य रचना-रजनी कटारे
जबलपुर ( म.प्र.)

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