गोलू बहुत शरारती बच्चा था,वह सबको बहुत सताता था।स्कूल में  किसी का टिफिन चुरा कर खा जाता तो कभी किसी की पेंसिल चुरा लेता।

सब उससे बहुत परेशान थे।एक दिन तो हद हो गई, रानी और बेबी दो सहेलियां स्कूल की बेंच पर बैठी अपना टिफिन खा रही थीं, उसने पीछे से जाकर उन दोनों की चुटिया आपस में बांध दिया।
जब वे खा कर जैसे  क्लास जाने को उठीं तो दोनों के बाल खिंचने लगे,दर्द से दोनों कराहने लगीं।
और  उन्हें दर्द में देख  पीछे से गोलू ताली बजा कर हंसने लगा ।

दोनों ने उसकी शिकायत प्रिंसिपल से की ।
प्रिंसिपल ने पहले भी उसकी बहुत शिकायत सुनी थी ।आज वे उसे वार्निंग देने के मूड में नहीं थे।
उन्होंने उसके माता पिता को चपरासी भेजकर बुलवाया।
गोलू के माता पिता भी बहुत परेशान थे,उन्होंने हाथ खड़े कर दिए ,उनका कहना था कि आप जो चाहें इसे सजा दें,हमें कोई आपत्ति नहीं है।

आखिर प्रिंसिपल ने उसे 10 दिन स्कूल नहीं आने की सजा दी।
ये गोलू के लिए कोई सजा नहीं थी बल्कि वरदान था।अब तो गोलू के मजे हो गए।

वह सुबह से ही निकल जाता ,गांव भर घुमा करता ,और चुपके से  बाग में घुस जाता ,बाग में ,आम ,अमरूद, अनार, इमली,आंवले के बहुत पेड़ थे।
बस बाग के अंदर  माली से बच कर घुसना कठिन काम था उसके बाद तो उन पेड़ों की झुरमुटों में किसी को खोज पाना मुश्किल था।
वह पीछे से चहारदीवारी फांद कर अंदर घुस जाता और ,छोटे छोटे पौधों को तोड़ देता । आम पर खूब पत्थर मार कर  आम तोड़ देता,जिससे कच्चे आम भी टूट जाता।
अब रोज का नियम हो गया था।चौथे  दिन  भी वो बाग में घुसा और रोज की तरह पेड़ों की बरबादी की ,और पत्थर से उन्हें चोट पहुंचाने लगा।
दोपहर हो गई ,सुस्ताने के लिए वह इमली के पेड़ के नीचे बैठ गया।
उसने देखा ढेर सारी चुडैलें उसके इर्द गिर्द इकट्ठा हो गईं।
उसमें से एक कह रही थी,ये लड़का बहुत दुष्ट है।यह हर किसी को नुकसान पहुंचाता है।
तो दूसरी चुड़ैल जिसके बाल खुले थे नाखून बड़े बड़े थे,उसने कहा , दीदी इसे भी पेड़ बना देते हैं ,फिर देखना मजा। लेकिन यह पेड़ के रूप में बाग के बाहर रहेगा ,जहां कोई भी इसके फल तोड़ लेगा।
और वो जोर जोर से हंसने लगीं।
थोड़ी देर में वह एक सुंदर फलदार वृक्ष में बदल गया।उसमें तरह तरह के नाना  प्रकार के सुनहरे फल लगे थे।
जहां गोलू पेड़ बना खड़ा था ,वो एक आम रास्ता था,जो भी उधर से गुजरता फलों को देख ललचा जाता और दो चार पत्थर मार फलों को गिराता।


गोलू दर्द से कराहने लगता,छोटे छोटे बच्चे पेड़ पर चढ़ जाते  और पत्ते ,और अधपके फलों को तोड़ तोड़ फेंकने लगते।
वह चिल्लाने लगा ,मुझे माफ कर दो , मैं कभी भी किसी पेड़ ,पौधे को नहीं नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा।मुझे नहीं मालूम था कि इतना दर्द होता है।अब मैं किसी को नहीं सताऊंगा।

उसकी आवाज सुन माली दौड़ा ।अंदर जाकर देखा तो गोलू चिल्ला रहा था ,मुझे माफ कर दो,मुझे माफ कर दो।
उसने उसे झकझोरा ,गोलू अभी कांप रहा था ,माली को देखा तो पूछने लगा वो चुडैले कहां हैं।
माली बोला _कौन चुड़ैल ?

अब तक गोलू की समझ में आ गया था कि वह कोई भयानक सपना देख रहा था।
लेकिन इस सपने ने उसे जिंदगी का  सबक दे दिया।
इस दिन के हादसे के बाद गोलू सुधर गया ।वह स्कूल का सबसे अच्छा विद्यार्थी बन गया।

इससे यही शिक्षा मिलती है कि बेवजह किसी को सताना नहीं चाहिए,पेड़ पौधे,पशु पक्षी सबमें जान है,उनमें भी दर्द होता है।इसलिए सबसे प्यार करो।

स्वरचित _संगीता