उस दिन जो तुमने जो अपनी मुस्कराहट के फूल खिलाये थे,
पूरे हो गए थे वो सपने जो तख़य्युल में मैंने सजाए थे।
तेरी सांसों की डोर से बंधी मेरी हृदय स्पंदन थी,
कोमल सा तेरा स्पर्श पाकर में हर्षित मन ही मन थी।
दिल चाहता है तुझे आँचल में समेट लूँ
लफ़्जों से चूम कर बेहिसाब प्यार दूँ।
मेरी हर खुशी है तुझसे मेरी हर दुआ में है तू,
ओस की बूंदों से मेरे मन की इक हरीतिमा है तू
मासूमियत और चंचलता से भरा तेरा चेहरा जब देखती हूँ,
कर लेती हूँ तुझे वात्सल्य भरा चुम्बन और आँचल में समेट लेती हूँ।
उषा का तेरा पहला चुम्बन पाती हूँ तो तेरे स्नेह की ऊर्जा से भर जाती हूँ,
तृप्त हो जाता है मन तेरे निश्छल चुम्बन से और मैं पूर्ण हो जाती हूँ।
@शीला द्विवेदी "अक्षरा"

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