ज़िन्दगी के तन्हाईयो से चूर होकर
जब दिल मायूस होजाता है
समझना मुश्किल होजाता है खुद को
ज़िन्दगी एक पहेली सी लगने लगता है
कोई नहीं होता दूर दूर तक अपना
इस तरह दिल एकेला होजाता है
लगता वीरान हर पल ज़िन्दगी
जैसे ज़िन्दगी साँसो पर अहसान कर रहा है
बेजुबाँ होती है परछाई भी खुद की
कहें भी तो दिले हाल अब हम किससे
चुभने लगती है मुस्कान होठों पर
खुद से ही ज़िन्दगी सवाल करने लगता है
क्या वजह है इस बेचैनी की मेरी
मेरे इस हालात का ज़िम्मेदार कौन है
देखे जो आईना में खुद को कभी
यूँ लगा जैसे आईना भी मुझ पे हँस रहा है
कौन हूँ मैं, और क्या है पहचान मेरी इस जहाँ में
बात करना चाही जो अपने अश्क़ से नैना
तो वो भी मुझसे रूठा सा लगता है....!!
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नैना....✍️✍️

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