व्यक्ति जिसे पसंद करता है  चाहता है  उसके साथ अधिक से अधिक पलों को जीने की कोशिश में वह कुछ ऐसा कर और बोल उठता है जिसे सामने वाला समझ नहीं पाता और कभी - कभी तों  ऐसी स्थिति पैदा हों जाती है कि बोलने  वाला स्वयं  भी नही समझ पाता कि उसने ऐसा किया और  बोला ही क्यूं ? ।  चूॅंकि अरण्या जिस कार्य की पूर्ति हेतु यहाॅं उपस्थित हुई थी उसके पूर्ण का सोचकर ही सुजाॅय के मुॅंह से शर्त वाली बात निकल गई थी । अरण्या के साथ कुछ और पल व्यतीत करने की  लालसा सुजाॅय के चेहरे पर साफ झलक रही थी जिसका अंदाजा अरण्या को भी था । जहाॅं सुजाॅय उसे रोकने की कोशिश में जों भी मुॅंह में आ रहा था , बोलें जा रहा था वहीं पर अरण्या जल्द से जल्द यहाॅं से जाना चाहती थी क्योंकि उसे डर था  कि अगर सुजाॅय ने आज  उससे अपने प्यार का इजहार कर दिया और उससे उसका जवाब माॅंग लिया तों हों सकता वह अपनी राह से भटक कर एक ऐसी राह पर निकल जाएं जिसकी कोई मंजिल ही नहीं है । कहीं - ना - कहीं वह भी तो सुजाॅय को पसंद करने लगी थी । वह था भी ऐसा कि कोई भी लड़की उसे पसन्द  करने लगे । हैंडसम और खुशमिजाज सुजाॅय की सबसे बड़ी खासियत जों अब तक अरण्या ने देखी थी वह थी उसका लड़कियों का सम्मान करना  ।  काॅलेज के दौरान अरण्या ने बहुत से ऐसे रईसजादों को भी देखा था जो लड़कियों को सिर्फ अपनी वासना शांत करने का जरिया ही मानते थे । उनकी नजरों  में लड़कियों के लिए सम्मान नाम की चीज तों बिल्कुल  भी नहीं थी  । अपनी शर्ट की तरह उन रईस लड़कों को उसने  लड़कियों को बदलते देखा था  और यही वजह थी कि रईस खानदान के लड़के अरण्या की पसंद नहीं थें । उसे तों सिंपल और उसकी भावनाओं को समझने और सम्मान देने वाला लड़का ही पसंद था । 

लड़कियों में ईश्वर ने कुछ ऐसे गुण देकर इस धरती पर भेज रखा है जिससे वह लड़कों के अंदर की भावनाओं को स्वयं ही परख सकती हैं । अरण्या की नजरों ने अब तक सुजाॅय के अंदर के इंसान को बखूबी परख लिया था और वह यह भी जानती थी कि जिस इंसान की कल्पना उसने अपने भावी जीवनसाथी के लिए कर रखी है वह सुजाॅय ही है लेकिन ..... 

यह लेकिन ही तो है जो व्यक्ति को आगे बढ़ने में हमेशा ही बाधक बनता आया है और आज अरण्या के लिए भी यही लेकिन बाधा बनकर उसकी सोच में बैठ चुका था और उसकी खुशियों में  आगे भी यही रोड़ा डालने वाला था । 

' मुझे देर हो रही है । आप जों भी कहना चाहते है खुलकर कहिए ।'             अरण्या ने कहा । 

' ठीक है फिर ! आप जब मेरे ही मुॅंह से सुनना चाहती है तो यही सही ।'     सुजाॅय ने कहा । 

' मैंने हमारी पहली डेट पर आपसे कहा था कि मैं आपके लिए एक गाना जों मैंने खुद लिखा है और खुद ही कंपोज भी किया है उसे आपको सुनाना चाहता हूॅं और यह मैंने हमारी दूसरी डेट यानी आज के लिए ही कहा था । देखिए ! आज मैं अपनी गिटार लेकर भी आया हूॅं ताकि आपको अपने दिल की बात गानों के  माध्यम से सुना  सकूं ।'    सुजाॅय ने अपने पास ‌ही रखी गिटार की तरफ इशारा करते हुए कहा । 

' आज मेरे पास समय नहीं है । मैं .... मैं  फिर कभी आपका गाना सुन लूंगी ।'  अरण्या ने रूक - रूक कर कहा । 

यह कहकर अरण्या अपना बैग उठा कर कुर्सी से उठने ही वाली थी कि सुजाॅय ने उसका हाथ पकड़ कर उसे फिर से कुर्सी पर बिठा दिया और उसकी ऑंखो में देखते हुए  कहा :- " मैं जानता हूॅं ! आपको अस्पताल जाने की जल्दी है लेकिन जाने से पहले मेरी एक बात सुनती  जाइए प्लीज़ । 

उन बड़ी - बड़ी प्यार भरी ऑंखो का जादू ऐसा था कि अरण्या उन ऑंखों में जैसे डूब ही गई । सब-कुछ भूल कर दोनों एक-दूसरे को देखते ही रहें । दोनों की ऑंखें बहुत कुछ एक-दूसरे से कह रही थी जिसे सुजाॅय ने तों अपनी जुबान पर लाई थी लेकिन अरण्या ने तों अपने दिल की बातें अपने होंठों पर ना  लाने का प्रण ही कर लिया था । यही वजह थी कि अपने जज्बातों को उसने दिल के कमरे में कैद कर उस पर कुंडी लगा दी थी और कुंडी के ऊपर बड़ा सा ताला भी जिसे कोई खोल ना सकें, वह खुद भी नहीं तभी तो इस ताले की चाबी उसने इतनी दूर फेंक दी थी जिसे वह चाहे भी तों ढूॅंढ ना सके । 


" मैं फिर भी तुमको चाहूंगी .. इस चाहत में मर ... अरण्या के मोबाइल की  रिंग टोन बजते ही दोनों की ऑंखें एक-दूसरे से अलग हुई । 

अरण्या ने मोबाइल को स्विच ऑफ कर दिया क्योंकि वह जानती थी कि जब तक वह इस फोन को उठा नहीं लेती उसकी बेस्ट फ्रेंड उसे काॅल करती रहेगी । 

' आप कुछ कहने वाले थे । जल्दी से कहिए ताकि मैं जा सकूं ।'    अरण्या ने सुजाॅय की तरफ देखते हुए कहा । 

' जी ! मैं कह रहा था कि आपके पास समय नहीं है तों फिर किसी और दिन ही सही लेकिन मैं तो आपको यह गाना सुना कर रहूंगा । वैसे भी हमारे पास तीसरी डेट तों हैं ही । क्या ख्याल है आपका ?  तीसरी डेट पर आप मेरा गाना सुनेंगी ना ?'      सुजाॅय ने अरण्या की तरफ देखते हुए कहा । 

' मैंने अपनी बात कह दी है । उम्मीद है मेरी बातों को और मुझे समझते हुए आप मेरे द्वारा की गई गलती को माफ़ कर देंगे। रही बात आपके मुझे आपके द्वारा लिखित गाने को गाकर मुझे सुनाने की तों मुझे लगता है कि इसका हक मुझे नहीं शिविका को है क्योंकि आप दोनों के ही  पिता ने आप दोनों को एक-दूसरे से मिलने के लिए कहा था । मैं तों आप दोनों के बीच में जबरदस्ती ला दी गई थी लेकिन अब मुझे अपनी गलती का एहसास हो चुका है और मैं इस गलती का प्रायश्चित अवश्य करूंगी । मुझे देर हो रही है प्लीज़ मुझे जाने की इजाजत दीजिए । मैं आई तों थी अपने बेस्ट फ्रेंड की रजामंदी से लेकिन मैं यहाॅं से जाना आपकी इजाजत से चाहती हूॅं । मुझे इजाज़त है ?' 
अरण्या ने सुजाॅय की ऑंखो में देखते हुए कहा । 

क्रमशः 

" गुॅंजन कमल " 💓💞💗