हॉस्पिटल में घुसते ही सभी स्टाफ उसे देख अवाक हो घूरने लगे,सबके दिमाग में एक बात चल रही थी ,ये शैव्या जैसी तो दिख रही है ,पर कहां शैव्या !और कहां ये मैडम! ,उसकी अपनी ही सहेली जो रिसेप्शन पर बैठी थी ,ने उसने पूछा _मैडम मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूं?

शैव्या ने बनावटी गुस्से से घूर कर उससे पूछा _क्यों तूने मुझे नहीं पहचाना?
शैव्या_नीतू उछल पड़ी । तू कितनी बदल गई है । ओह माय गॉड ।
फिर आस पास के नए पुराने स्टाफ की ओर मुखातिब हो नीतू ने कहा __हैलो ,हैलो..... आज का दिन सरप्राइज़ का है ,हमारे बीच हमारी पुरानी  स्टाफ शैव्या आई है ।

शादी के बाद से तो तू एकदम से नदारद हो गई ,कभी तो हमें भी याद कर लिया करती_नीता शिकायती लहजे में कह रही थी।
शैव्या कुछ बोलती इससे पहले सारे उसके समय के स्टाफ ने उसे घेर लिया ।सब उससे कुशल क्षेम पूछने लगे।

कुछ ही देर में डॉक्टर अरोड़ा और उनकी पत्नी भी आ गईं, वे शादी में शामिल नहीं हो पाए थे ,इसलिए उन्होंने माफी मांगी और उसे शगुन का लिफाफा दिया।

खट्टी मीठी यादों को याद कर शैव्या और उसके दोस्त सब भावुक हो गए।
शैव्या ने नीतू से पूछा ,डॉक्टर राकेश दिखाई नहीं दे रहे।
तेरे जॉब छोड़ने के बाद वो भी गुरुग्राम में ही शिफ्ट हो गए हैं। तू मिली नहीं क्या उनसे?

अच्छा वो वहीं आ गए हैं ,मुझे एक फ्रेंड रिक्वेस्ट तो आई थी, सोशल मीडिया पर ,लेकिन उसमें प्रोफाइल फोटो नहीं थी ,और वर्क्स इन गुरुग्राम लिखा था ,तो मैंने ध्यान नहीं दिया ।

उनका फोन नंबर दे, मैं उनसे मिलने जाऊंगी।
इतनी क्यों उतावली हो रही ,देती हूं बाबा _नीतू ने हंस कर कहा।
और नीतू ने डॉक्टर राकेश का नंबर  दे दिया।
शैव्या सबसे मिलकर ,वहां से घर लौट आई।
शाम को ही गुरुग्राम के लिए निकलना था।

उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी,एक लंबे अरसे के बाद जो सबसे मिली थी ।
अगले दिन से फिर वही दिनचर्या रचित की।
लेकिन शैव्या की दिनचर्या में बदलाव होने वाला था।
अगले दिन ,उसने रचित के जाते डॉक्टर राकेश को फोन किया।
हैलो कौन? _एक जानी पहचानी आवाज फोन के दूसरे तरफ से आई।
डॉक्टर राकेश _शैव्या उसकी आवाज सुनते ही कुछ देर के लिए निः शब्द हो गई।
उधर से झल्लाहट भरी आवाज आई _कौन है,कुछ बोलते क्यों नहीं , मैं फोन रख दूंगा।पता नहीं कैसे कैसे लोग फोन कर देते हैं?
शैव्या ने जल्दी से कहा _ मैं शैव्या।
कौन??? अब राकेश के चौंकने की बारी थी।
शैव्या तुम!!!!!!
हां , आप कैसे हैं?_शैव्या ने कहा।
मैं ठीक हूं ,और तुम?तुम्हारे हसबैंड कहां हैं?तुम्हारा घर कहां है?
अरे अरे एक साथ इतने सवाल ? आप बताओ आपका क्लिनिक कहां है ,मैं आती हूं।
अरे मेरा क्लिनिक तो डीएलएफ फेज _1 में है।

अरे वाह!! मेरा क्लिनिक डीएलएफ फेज 2में है।
ठीक है ,तुम 11 बजे तक आओ _डॉक्टर राकेश ने कहा।

उस दिन वह बहुत खुश थी,घर के नौकरों को उसकी खुशी साफ दिख रही थी।
आज बहुत देर तक उसने शॉवर लिया,अच्छे से तैयार हुई,कई बार वार्डरोब में से कपड़े निकालती फिर रखती ,कभी इंडियन कभी फ्यूजन तो कभी वेस्टर्न ड्रेस ,उसे समझ में नहीं आ रहा था वो क्या पहने।
वह बहुत ही कन्फ्यूज और नर्वस हो रही थी,इतना तो वो जब रचित से पहली बार मिलने गई थी ,तब नर्वस नहीं थी।

वो खुद समझ नहीं पा रही थी कि डॉक्टर राकेश से तो पहले  वह कितनी दफा मिल चुकी थी ,तो आज उनसे मिलने जाने में ऐसा क्यों लग रहा कि ये उसका पहला मिलन है।

आखिर काफी उहापोह ,और घड़ी की सुइयों को तेजी से भागते देख वह एक साड़ी निकालती है।

ये साड़ी डॉक्टर राकेश ने ही उसकी शादी के समय उपहार में  दिया था।बहुत संभाल कर रखा था शैव्या ने ,वैसे भी वो ज्यादा वेस्टर्न ही पहनती थी ।

लाल रंग की लहरिया शिफॉन की  साड़ी,उसपर उसने काले रंग का कंट्रास्ट ब्लाउज पहना।
अपने लंबे गेसुओं को संवारा,और उसमें लाल रंग का गुलाब लगाया।अब वो बला की खूबसूरत लग रही थी । अंत में उसने अपना मनपसंद परफ्यूम लगाया ।
जिम जाने और अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत होने के कारण उसकी उम्र जैसे रूक सी गई थी।शरीर के अंगों के उतार चढ़ाव साड़ी में निखर आ रहे थे।
11 बजने ही वाले थे।उसने प्राइवेट टैक्सी मंगवाई और निकल गई।

क्रमशः