मां धरती और पिता आसमान।
कोई न दूजा इनके समान।।
बचपन से है लाड लड़ाए अपना सुख दुख भूल गए हैं।
संतति के सुख की खातिर अपना सब न्यौछावर करके।
सुख से फूली नहीं समाए 
देख देख के नित जीते हैं संतति के सुख जतन यह करते।।
गलती करने पर भी दे देते क्षमादान सुख का आशीष दे।
धरती सा  धीरज है मां में अरे पिता में गगन विशाल।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार युक्त डॉक्टर आशा श्रीवास्तव जबलपुर