तेरी गोद में सर रखकर ,सो जाऊं मैं थक कर ,
ममता की क्यारी जिसने बड़े हम जमकर ।
मां बिन तेरे जैसे  सूखी डाली हम l

बड़े नाज़ो से पाला ..कभी डांटा ,तो उससे ज्यादा पुचकारा। मेरे आंसुओं पर तेरा दिल भी कपकपाया ।
मुझसे ज्यादा नहीं कोई तेरा दुलारा।

 याद है मुझको वह पल ,मेरी शादी की बात चल रही थी, जहां कोई  ऑच ना आए मुझको तू  ऐसा घर ढूंढ रही थी । मुझको विदा करके तू छुपकर रोई थी ,
 तुझसे बिछड़ कर मेरी अखियां भी ना सोई थी ।
 
पराये घर में मैं जा तो बसी थी पर याद तेरी तड़पाती रहती थी 
मायके जैसा प्यारा घर कोई नहीं होता ,
यह बात अच्छे से समझ आ गई थी ।

मां अब तो तू बहुत दूर चली गई है 
 तेरी बिटिया अच्छे बुरे लोगों के साथ जीना सीख गई है अब कोई भी दर्द मुझे तोड़ नहीं पाता ।
 तुझसे जो सीखा है मैंने जीना ।
 
 मां तेरी कुर्बानियां अब समझ आने लगी है ,
 तेरी ही गुजरी हुई राह से जो गुजर रही हूं ,
 तेरी सारी तकलीफों को महसूस कर सकती हूं ,
 अब मैं खुद जो मां बन गई हूं ।
 
 मां तेरी मेहनत ,तेरी कुर्बानियों को यू ज़ाया न जाने देंगे 
 मैंने तुझसे जो भी सीखा दूर- दूर तक उसे फैलएंगे ..
 तेरी चाहतों के सफर को हम आगे बढ़ाएंगे ..
 इंशाअल्लाह एक दिन फतेह जरूर पाएंगे !!
 
हुमा अंसारी