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बिटिया   तुम   शक्ति   हो  !
श्रृंगार   में   मत    उलझो !!

स्वप्न  भरें  हैं  नयन   तुम्हारे ,
अश्रु  धार  न   बह      जाएं ...
आंखों    के   मरूस्थल  में ,
बस  कांटे   न   रह   जाए...
आंखों  की  काजल  के संग
सपनों   को   न   बहने   दो ।
बिटिया    तुम  ............…

पैरों    की    पाजेब    को ,
बेडियां    न   बना   ले ना......
लाल   महावर   बिछिया  में,
कदमों  को  न  उलझा लेना .....
लक्ष्य को साधो तुम पहले ,
प्रगति  पथ  पर  आगे बढ़ो.....
बिटिया तुम....….......

मेहंदी  की लाली में अक्सर ,
भाग्य रेखा को छुपते देखा है.....
सोलह श्रृंगार को शौर्य के आगे,
मैंने    झुकते    देखा  है  .....
अबला  नहीं  तुम सबला  हो ,
शक्ति    का     रूप     धरो ।
बिटिया तुम......

.….…पिंकी मिश्रा
भागलपुर बिहार ।