शैव्या घर में रहकर काम निपटाती ,एक घरेलू पत्नी ,बहू,भाभी बन कर वो बहुत खुश थी।
रचित सुबह निकलता ,और वापस लौटने में उसे देर हो जाती ।गुरुग्राम से दिल्ली लौटने में ट्रैफिक तो कभी ऑफिस में कार्य की अधिकता से ।
फिर माता पिता ने सलाह दी ,क्यों न तुम गुरुग्राम में ही कोई फ्लैट ले लो,सप्ताहांत में कभी तुमलोग तो कभी हमलोग आकर मिल लिया करेंगे।
रचित को ये प्रस्ताव अच्छा लगा।
दोनों गुरुग्राम शिफ्ट हो गए, शैव्या ने घर को अपने मनमुताबिक सजाया।अब वह बहुत खुश थी ,यहां अपने मन का खा सकती थी ,घूम सकती थी,आधुनिक कपड़े पहन सकती थी ,वैसे रचित के घर में भी कोई रोक टोक नहीं थी ,लेकिन वहां हर कुछ मर्यादा के दायरे में रहकर करना होता था।
रचित के ऑफिस के तरफ से फैमिली लेट नाइट पार्टी होती थी,रचित को यह सब पसंद नहीं था ,अगर शैव्या को पार्टी के बारे में पता रहता तो वह पीछे ही पड़ जाती ,और रचित को न चाहते हुए भी शामिल होना होता ।
छोटे छोटे कपड़े,आधे से ज्यादा खुले ,खुलेआम अंग प्रदर्शन ,शराब यही सब तो पार्टी में होता था,लेट नाइट इसलिए कि जिनके बच्चे हों वो सो जाएं,और पति पत्नी एंजॉय कर सकें।
अब शैव्या अपनी पुरानी मुफलिसी की जिंदगी भूल कर चकाचौंध की दुनिया में शामिल हो चुकी थी।
हमेशा सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती ,कभी कभी तो रचित झल्ला उठता ।
तब रोनी सूरत बना शैव्या कहती ,आप तो घर पर होते नहीं ,मैं अकेली बोर होती रहती हूं तो क्या करूं,यही एक सहारा है।
रचित के पास कोई जवाब भी नहीं होता ,क्या कहता ,सच भी था ,अड़ोस पड़ोस की महिलाएं भी ज्यादा तर कामकाजी ही थीं।
घर में एक नौकर था जो खाना बनाता था।सुबह झाड़ू पोछा करने वाली जसोदा आती थी ।घर में उसके लिए कोई काम भी नहीं होता था ।
एक दिन उसने रचित से कहा _मुझे लग रहा है कि मैं कुछ मोटी हो रही हूं,क्यों न जिम ज्वाइन कर लूं।
रचित ने कहा_ ठीक है,कर लो जिम ज्वाइन।
पास के ही जिम में शैव्या ने जाना शुरू कर दिया। वह रात में सोशल मीडिया में देर रात तक एक्टिव रहती उसने नए नए दोस्त बना रखे थे,नई नई अदाओं वाली पिक्चर अपलोड करती , सोशल मीडिया की सनसनी बन गई थी।रचित रात को थका हारा आता ,माता पिता से फोन पर उसकी बात होती और सो जाता।
सुबह रचित के उठने से पहले शैव्या जिम निकल जाती और तब आती जब रचित ऑफिस के लिए निकलने वाला होता।
रचित ने काम के प्रेशर में जरा भी ध्यान नहीं दिया कि शैव्या की उसके प्रति बेरुखी धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी।
वह अपने काम में मशगूल था और शैव्या अपनी दुनिया में।एक ही छत के नीचे दोनों अजनबी बन चुके थे।अब लेट नाइट पार्टी में अकेली शैव्या ही जाती थी।
रचित की मम्मी को घुटनों की दिक्कत थी तो ,अब उनलोगो का भी आना जाना कम ही हो गया था।
एक दिन रचित के बचपन के दोस्त और सहकर्मी नीरज ने इशारों इशारों में आगाह किया कि,यार भाभी कुछ ज्यादा ही आजाद हो गईं हैं।
अपने ऑफिस के कुछ लोगों की नजर उन पर है ।,पार्टी में अगर तू आये तो ही ,भाभी को ले आ ,वरना उन्हें अकेली मत भेज ,शराब के नशे में गाड़ी में लिफ्ट देने के बहाने बहुत कुछ हो सकता है ,तू समझ रहा है न मेरी बात।
अभी तक तो मैं ध्यान रख रहा था,जैसे ही वो लड़खड़ाती थी मैं उन्हें घर छोड़ दे रहा था ,लेकिन अगले सप्ताह मुझे जर्मनी जाना हैं,ऑफिशियल टूर पर।
ये सब सुनकर रचित कुछ सतर्क हुआ ,वह भी महसूस कर रहा था ऑफिस के लोग उसे देख देखकर हल्के से मुस्कुराते थे।
उसने अब शैव्या को नोटिस करना शुरू कर दिया।
इस बार शनिवार को वो दिल्ली माता पिता के पास निकल गए।
बहुत दिनों के बाद सबने शैव्या को देखा तो हैरान हो गए,साधारण सी शैव्या अब कुछ ज्यादा ही ग्लैमरस दिख रही थी।
शैव्या अपने पिता और भाई बहन से मिलने गई । वह उन लोगों के लिए महंगे महंगे तोहफे लेकर गई थी।भाई बहन शैव्या के दीदी दीदी कहते गले लग गए।
जबकि पिता खुश तो थे ,पूछना चाहते थे कि अभी तक कोई खुशखबरी क्यों नहीं है,लेकिन हिचक वस हिम्मत नहीं हुई,आज शैव्या की मां होती तो बेटी से ये सब पूछती ।
थोड़ी देर बाद भाई ,बहन से बात कर शैव्या वहां से निकल गई ।
रास्ते में डॉक्टर अरोड़ा का नर्सिंग होम पड़ता था,सोचा क्यों न सभी स्टाफ से मिल लूं,कौन कहां है सबकी जानकारी ले लूं,ऐसा सोच वह नर्सिंग होम के अंदर घुस गई।
क्रमशः

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