दिल की चिड़िया मेरे ये चहक सी गई।
बात दिल की ये दिल तक पहुंच सी गई।

आपके उन गुलाबों को ले  सो गया
रात सारी  हमारी  महक सी     गई।

मेरे  जज्बात  इतने ये  उड़ने  लगे
चाल मेरी ये  जैसे  बहक  सी गई।

क्या करें कि किसी की अमानत हो तुम
बात ये ही  गले  में अटक सी गई।

ख्वाब में रात मुझसे तूं  टकरा गई
तेरी चूड़ी करों  में खनक  सी गई।

कैसे 'किंजल्क' तुझको भुला पाएगा
मेरे आगोश में तूं सिमट सी गई।
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      किञ्जल्क त्रिपाठी "किञ्जल्क" आजमगढ़ (उ.प्र)