स्नेह-खुशियों सी बागियों में,
झलक रहा, किसी का इंतज़ार...
अब लाली की रंग छिड़ी है,
मेंहदी हाथों का गुलबहार...
एक पंखुरियों की कली बनी,
'रोचक' ऐसी चमत्कार...
उन नाजुक सी हथेलियों पर,
चढ़ी प्यार की गुप्त 'सिंगार'...
ना ये रिश्ता छुटने देंगे,
अपनी छाप अदाओं का...
ललक बँधि है प्रेम की बंधन से,
एक मुस्कान तो दे मेरे यार...
✍️ विकास कुमार लाभ
मधुबनी(बिहार)

0 टिप्पणियाँ