" पिताजी आप अचानक यहां सब कुशल तो है आपकी तो तबीयत ख़राब थी इसलिए आप शादी में नहीं आए थे अब तबीयत कैसी है आपकी"?
पार्वती ने घबराते हुए आश्चर्य से पूछा।

  " पार्वती मेरे लिए इतना परेशान होने कि ज़रूरत नहीं है मैं 90 साल का हो गया हूं अब तो जब चाहे ईश्वर का बुलावा आ जाए इसलिए ज्यादा दुखी होने की जरूरत नहीं है। अच्छा क्या यहीं दरवाजे पर खड़ी रहकर बात करोगी या अंदर आने के लिए भी कहोगी" भवानी ठाकुर ने हंसते हुए कहा

   " आइए आइए पिताजी आपको देखकर मैं सब कुछ भूल गई" पार्वती जी ने हंसते हुए कहा भवानी ठाकुर और कुंदन ठाकुर अंदर आ गए।

   " प्रणाम चाचा जी" लक्ष्मी जी ने हाथ जोड़कर भवानी ठाकुर से कहा

    लक्ष्मी जी को देखकर भवानी ठाकुर और कुंदन के चेहरे पर घृणा के भाव उभर आए पर तुरंत उन्होंने अपने चेहरे पर बनावटी हंसी लाते हुए कहा " कैसी हो लक्ष्मी बिटिया? वर्षों बाद तुम्हें देख रहा हूं तुम्हें देखकर अपने दोस्त प्रताप की याद ताजा हो गईं"

   " मैं ठीक हूं चाचा जी आप लोग कैसे हैं"? लक्ष्मी ने भी मुस्कुराते हुए पूछा

   " तुमने हमें ठीक रहने कहां दिया" कुंदन ने धीरे से दांत पीसते हुए कहा

    " कुछ कह रहे हैं क्या कुंदन भैया मैं समझ नहीं पाई आपने क्या कहा "? लक्ष्मी ने सहजता से पूछा

   " अरे कुछ नहीं बिटिया कुंदन की धीरे बोलने की आदत है यह कह रहा है कि,हम लोग भी ठीक हैं" भवानी ठाकुर ने जल्दी से बात को सभाल लिया।

   तभी गार्गी  हाल में दाखिल हुई उसने भवानी ठाकुर का पैर छूकर प्रणाम किया, " सदा सुहागन रहो बहू अब यही आशीर्वाद दे सकता हूं क्योंकि अब तुम इस खानदान को वारिस तो दे नहीं सकती हो जो तुम्हें पुत्रवती होने का आशीर्वाद दूं" भवानी ठाकुर ने जहरीली मुस्कुराहट के साथ कहा ।

   " आप ऐसा क्यों कह रहे हैं चाचा जी अब लड़के और लड़कियों में कोई फ़र्क नहीं है आज लड़कियां भी अपने माता-पिता का नाम रोशन करती हैं।अब पहले वाली बात नहीं है आज लड़कियां लड़कों से किसी बात में कम नहीं हैं वह लड़कों से बढ़कर हैं।रूद्र के तो तीन-तीन बेटियां हैं और तीनों ही बहुत काबिल हैं और फिर गार्गी को तो तीन-तीन बेटे मिल गए क्योंकि दामाद भी तो बेटे जैसा है" लक्ष्मी जी ने भवानी ठाकुर से मुस्कुराते हुए कहा

    " बुआ जी आप नहीं समझ रहीं हैं नानाजी को हमारे खानदान की बहुत चिंता है इसी लिए वह हमेशा इस खानदान के वारिस की बात करते रहते हैं। मुझे तो कभी कभी लगता है कहीं ईश्वर नानाजी की मन की इच्छा पूरी न कर दे और इस खानदान का वारिस जिन्न की तरह प्रकट हो जाए" गार्गी ने मुस्कुराते हुए मजाकिया अंदाज में कहा पर उसके चेहरे पर रहस्यमई मुस्कान फैलीं हुई थी।

    गार्गी की बात सुनकर लक्ष्मी के चेहरे पर मुस्कान फ़ैल गई जबकि पार्वती ने घूरकर देखा,

    " आप पलक की शादी में नहीं आए थे चाचा जी" लक्ष्मी ने पूछा

    " गार्गी बहू ने हमें बुलाया ही नहीं था बिन बुलाए कैसे आ जाते बिटिया" भवानी ठाकुर ने गार्गी को देखते हुए कहा

   " भाभी आपने चाचा जी को शादी में क्यों नहीं बुलाया था और गार्गी तुम्हें भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए यह तो गलत बात है" लक्ष्मी जी ने नाराज़गी ज़ाहिर की

    " मेहमानों की लिस्ट तो मां जी और आपके बेटे ने बनाई थी मुझे इस विषय में कोई जानकारी नहीं है" गार्गी न अपनी सफाई में कहा।

    " अगर हम लोग भूल गए तो तुमने ही कौनसा याद रखा था तुम्हें तो अपनी बेटियों से ही फुर्सत नहीं थी तो और किसी के विषय में तुम्हें कहां याद रहेगा" पार्वती जी को मौका मिल गया गार्गी को ताना मारने का,

    " मां जी आप मेरी बेटियों के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़ी रहतीं हैं इस बात में मेरी बेटियां कहां आ गई"? गार्गी ने गम्भीर लहज़े में पूछा

    " अरे बिटिया छोड़ो इन बातों को हमें तो हमेशा से ही इस घर में कोई सम्मान नहीं दिया गया था वही काम अब गार्गी बहू कर रही है तो क्या गलत है" भवानी ठाकुर ने उदास लहज़े में कहा पर उनके चेहरे पर धूर्तता दिखाई दे रही थी।

    " सुगंधा बिटिया नहीं दिखाई दे रही है" भवानी ठाकुर ने बात को बदलते हुए कहा।

   " जमुना काकी सुगंधा को बुला दो कहो नानाजी बुला रहें हैं" पार्वती के कहा

   थोड़ी देर बाद जमुना ने आकर बताया कि, सुगंधा के सिर में दर्द है वह नहीं आएगी।

   " इस लड़की को भी अपने पिता की तरह मेरे घर वालों से नफ़रत है।इस घर की लड़कियों को खानदान की मान-मर्यादा का कोई ख्याल ही नहीं है" पार्वती जी ने बड़बड़ाते हुए कहा।


     " नाराज़ क्यों हो रहीं हैं भाभी उसकी तबीयत  ठीक नहीं होगी इसलिए यहां नहीं आई" लक्ष्मी ने अपनी भाभी का गुस्सा शांत करने के उद्देश्य से कहा जबकि उन्हें भी पता था कि सुगंधा क्यों नहीं आई।

    " अच्छा पार्वती अब हम लोग चलते हैं" भवानी ठाकुर ने कहा

  "नानाजी आपको शिकायत है कि मैंने आपको पलक की शादी पर नियंत्रण नहीं दिया लेकिन आज आपको पहले से ही निमंत्रण दे रहीं हूं।  मां जी के जन्मदिन पर आप जरूर आइएगा इस बार मांजी का जन्मदिन मैं बहुत धूमधाम से मनाऊंगी और मां जी को उनके जन्मदिन पर ऐसा तोहफ़ा दूंगी  जिसे वह जीवनपर्यंत याद रखेंगी" गार्गी ने मुस्कुराते हुए कहा उसकी मुस्कराहट को देखकर पार्वती जी ने चिढ गई।

    " मुझे कोई जन्मदिन नहीं मनाना है और बहू तुम हर बात पर मुस्कुराती क्यों हो"? पार्वती ने गुस्से में पूछा।

   "मां जी  पहले मैं जब मुस्कुराती नहीं थी तो भी आपको शिकायत थी अब मुस्कुराती हूं तो भी शिकायत है मुझे तो आप की बात समझ में ही नहीं आती " गार्गी ने इस बार गुस्से में जवाब दिया।

   तभी रूद्रप्रताप  हाल में दाखिल हुए " गार्गी तुम ने कसम खा ली है क्या,कि मां का अपमान  किए बिना तुम्हें चैन नहीं आएगा••••• " ??  रूद्र ने गुस्से में पूछा•••••••••• क्रमशः
डॉ कंचन शुक्ला
स्वरचित मौलिक
   

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