सब कहते है ,तू बेटी है 
बेटा नहीं है 
पूछता हूँ तुमसे 
क्या उनके प्रश्नों का कोई हल नहीं है 
वो कहते हैं 
तुझमें बेटों सा बल नहीं है 
तू कमजोर है 
अबला है, इक नारी ही है 
इस मिथक इस भ्रम को 
तुम्हें मिटाना ही होगा 
बनकर लौह स्तंभ 
इस जहाँ को दिखाना ही होगा 
पड गये भेदभाव के परदे 
लोगों की चमकती आखों पर 
उस परदे को तुम्हें हटाना ही होगा 
करके दीर्घ यत्न 
ये प्यारी बेटियों 
लगे अबला के कलंक को मिटाना ही होगा । 

हे सृष्टि की निर्माता 
हे घर की भाग्य विधाता 
तुम ही तो बेटी 
बहना,काकी और माता हो 
तुम ही इन्दिरा 
तुम ही कल्पना 
तुम ही तो जीजाबाई हो 
अंगरेजों को भी पछाड दे 
ऐसी सिंहनी लक्ष्मीबाई हो। 

तुम्हें कमजोर कहने वाले 
अपनी बातें बदल डाले 
गर सभंव न हो तो 
अपनी जुबां कटा डाले 
तुम ही तो हो 
जो कांधे से कांधा मिलाए 
वीर बेटों के संग खडी हो 
पछाडने राष्ट्र दुश्मनों को 
कफन बांधे खडी हो । 

नमन है बेटियों 
वदंन है तुम्हारा 
तुम अबला कहां 
तुम कमजोर कहां 
तुम तो बेटों से भी बढकर हो 
देश रक्षा को 
खाने बदूंक की गोली 
तानकर फौलादी सीना 
संग बेटो के 
इक पहाड सी खडी हो 
बचाऊंगी तिरंगे की हर पल लाज 
जिद को ठाने हुए खडी हो। 

✍️✍️✍️प्रितम वर्मा✍️✍️💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖