" या खुदा तुमने यह कैसा मंज़र दिखाया है,
अब तक तो हुस्न के कदमों में,
इश्क़ ने अपना सिर झुकाया है,
पर यहां तो नज़ारा ही कुछ और है,
हुस्न यहां इश्क़ के कदमों में झुका है,
हुस्न मुस्कुराए तो इश्क़ सज़दे करता है,
यहां तो हुस्न के मुस्कान पर,
इश्क़ ने पहरे लगाएं हैं।।

  " मेरा इज़हारे मोहब्बत कैसा लगा ठाकुर साहब पसंद तो आया होगा मैं जानती हूं" गार्गी ने मुस्कुराते हुए कहा।

" तुम्हारा दिमाग ख़राब हो गया है जो ऐसी बातें घर के बड़ों के सामने कर रही हो" रूद्रप्रताप ने गुस्से में दांत पीसते हुए कहा।
" शुक्रिया शुक्रिया आप का रूद्र जी आपको मेरा इज़हारे मोहब्बत करने का तरीका पसंद आया पर मैंने सबके सामने अपनी मोहब्बत का इज़हार किया शायद यह आपको पसंद नहीं आया। मैं भी कितनी बेवकूफ हूं मैं तो भूल गई थी कि, आपको तो एकांत में दुनिया वालों से छुपकर इश्क़ करने की आदत है आप अपने इश्क़ मोहब्बत की बातें सिर्फ़ अपनी मां को बतातें हैं। मैंने जो कहा वह सच है ना ठाकुर साहब"?? 

लेकिन एक बहुत बड़ी गलती मुझसे हो गई मुझे अपनी मोहब्बत का इज़हार नानाजी के सामने नहीं करना चाहिए था।वह ठहरे पुराने ख्यालातों के कहीं मेरी इस हरकत से उन्हें धक्का न लगा हो और उनका वीपी बढ़ जाए और कहीं ख़ुदा न खास्ता उन्हें हार्ट अटैक आ गया और उन्हें कुछ हो गया तो मां जी और मामाजी यही कहेंगे कि, रायबहादुर प्रताप ठाकुर के खानदान ने एक बार फिर से मेरे पिताजी की जान ले ली और फिर वह नाराज़ होकर ना जाने क्या कर बैठें" गार्गी ने मुस्कुराते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में कहा।

   गार्गी की बात सुनकर भवानी ठाकुर, पार्वती, और कुंदन ठाकुर के चेहरे पर घबराहट दिखाई देने लगी वह लोग आश्चर्य से एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।

   " क्या अनाप-शनाप बोले जा रही हो गार्गी बहू" पार्वती जी ने गुस्से में कहा उनकेे चेहरे पर घबराहट के भाव थे।

    " गार्गी बहू क्या कहा तुमने फिर से क्या पहले भी इन लोगों ने हमारे खानदान पर कोई इल्ज़ाम लगाया है" लक्ष्मी ने आश्चर्य से पूछा।

  " अरे नहीं बुआ जी मेरे कहने का मतलब यह था कि, अगर हमारे घर में नानाजी को कुछ हो जाए तो बदनामी तो हमारे खानदान की ही होगी" गार्गी ने गहरी नज़रों से पार्वती और भवानी ठाकुर की ओर देखते हुए कहा।

   गार्गी की नज़रों की चुभन वह बर्दाश्त नहीं कर सके भवानी ठाकुर ने जल्दी से कहा " पार्वती हम चलते हैं बहुत देर हो गई हैं और वह उठकर खड़े हो गए।

  " नानाजी आप लोग मां जी के जन्मदिन पर जरूर आइएगा वह दिन मां जी के जीवन का बहुत ख़ास दिन होगा जिसे वह कभी भूल नहीं पाएंगी।उस खुशी के अवसर पर अगर आप भी यहां होंगे तो मां जी की खुशियों में चार चांद लग जाएगा" गार्गी ने मुस्कुराते हुए एक एक शब्द चबाते हुए कहा।

    " उस दिन ऐसा क्या करने वाली हो जो मेरी ख़ुशी दुगुनी हो जाएगी?आज से पहले तो कभी भी मेरे जन्मदिन पर तुम इतना खुश नहीं हुई थीं इस बार क्या ख़ास बात है जो तुम इतनी खुशी जाहिर कर रही हो इसमें भी तुम्हारी कोई चाल है क्या"?? पार्वती ने  चिढ़ते हुए कहा

   " कैसी बात कर रही हैं मां जी मैं कोई चाल क्यों चलूंगी मैं तो इस लिए कह रही थी कि,इस बार आपका पूरा परिवार आपके जन्मदिन पर आपके साथ होगा।आपकी ननद, बेटी, बहूएं, बेटे, पोते पोतियां, दामाद क्या कभी ऐसा अवसर पहले आया है? तो हुआ न यह दिन ख़ास आपके लिए कि, नहीं हुआ मुझे जवाब दीजिए"?? गार्गी ने रहस्यमई मुस्कान बिखेरते हुए कहा।

   " मेरा एक बेटा है और यह पोते कहां से आ गए" पार्वती ने घूरकर देखते हुए कहा।

   " मां जी आप तो हर बात का उल्टा मतलब निकाल लेती हैं मेरे दामाद आपके पोते हुए की नहीं आप तो मेरी हर बात पर नाराज़ हो जाती हैं" गार्गी ने इस बार गम्भीर मुद्रा में जवाब दिया।

    " भाभी बहू ठीक तो कह रही है इसका दामाद भी तो आपका पोता ही हुआ" लक्ष्मी ने मुस्कुराते हुए पार्वती से कहा।

    " मैं चलता हूं पार्वती" यह कहकर भवानी ठाकुर और कुंदन वहां से चले गए पर जाते समय भी उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखाई दे रही थी।

  गार्गी की बातों पर पार्वती को भी विश्वास नहीं हो रहा था उनके चेहरे के भाव बता रहे थे कि उनके मन-मस्तिष्क में सवालों की आंधी चल रही है और उन्हें उसका जवाब नहीं मिल रहा है।

   पार्वती के चेहरे के आते-आते भावों को देखकर गार्गी के चेहरे पर संतोष झलकने लगा।

तभी फ़ोन बजा गार्गी ने रिसीवर उठाकर "हेलो कौन??

  " पलक बेटा कैसी हो? ठीक है तुम लोग वहां इंजॉय करो वहां से कब आओगी? मैं बेसब्री से इंतज़ार कर रहीं हूं तुम लोगों के लौटने का और हां दादी के जन्मदिन पर तुम सभी को यहां आना है। अच्छा मैं फ़ोन रखतीं हूं तुम दोनों वहां अच्छे से रहना" गार्गी ने कहा और फ़ोन रख दिया।

   " गार्गी बहू पलक ठीक तो है कब लौट रही है शिमला से"? लक्ष्मी ने मुस्कुराते हुए पूछा

   " बुआ जी पलक को तो मां के जन्मदिन से पहले यहां आना ही है वह उससे पहले आ जाएगी" गार्गी ने पार्वती जी को देखकर कहा।

  गार्गी को अपनी तरफ़ देखता पाकर पार्वती के चेहरे पर परेशानी दिखाई देने लगी वह सोचने लगी  कुछ तो गार्गी के मन में ऐसा चल रहा है जो वह जान नहीं पा रही है वह जो भी बात है उसके लिए समस्या उत्पन्न कर सकती है••••

•••••• क्रमशः
डॉ कंचन शुक्ला
स्वरचित मौलिक