मन की गहराइयों की ये
गवाह होती है
कलम सिर्फ कलम ही नहीं
मन की पुकार होती है ।
उतारती है जज्बातों को
गहराई से जो कागज पर
वो सिर्फ एक कलम ही नहीं
मन की आवाज होती है ।
उतार दे जो ह्रदय में
संवेदनाओं का सागर
वो सिर्फ एक कलम ही नहीं
मन की पुकार होती है ।
मौन होकर जो बोलती है
अपनी पहचान खोजती है
वो मन की पुकार ही
कलम की पहचान होती है ।
लिखती है जो कलम
स्याही से कागज पर
वो सिर्फ शब्द ही नहीं
इस मन की पुकार होती है ।।
कविता गौतम✍️

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