वर्षावन में अपनी स्थिति स्पष्ट करने और चिन्द्विन नदी को देखकर दिशा ज्ञान प्राप्त कर लेने के बाद वह नदी के किनारे उसके प्रवाह की विपरीत दिशा में आगे बढ़ने लगा।


   नदियों के किनारे जाना बहुत लाभकारी होता है, इससे भोजन और पानी तो मिलता ही है साथ में मानव बस्तियाँ भी प्रायः किसी नदी किनारे ही होती हैं और ऐसी बड़ी-बड़ी नदियाँ यातायात का भी सुगम माध्यम होती हैं।


      यमदूत का रूप अपनी धुन में चलते जा रहा था तभी उसे मोटर की आवाज सुनाई दी जो नदी में से आ रही थी, किसी खतरे की आशंका के कारण वह तुरंत झाड़ियों में छुप गया। वह जहाँ छिपा था वहाँ से नदी का कुछ भाग दिखाई दे रहा था, वहीं से चुराई हुई दूरबीन से उसने देखा कि

         लकड़ी की बनी दो मोटर बोट पर सवार कुछ लोग कहीं जा रहे थे, इन लोगों ने सेना की वर्दी पहन रखी थी। शायद यह सैनिक म्यामांर की सेना के थे।

" नहीं नहीं ये सैनिक म्यामांर सेना के नहीं NSCN के लड़ाके हैं ", यमदूत ने मन में ही कहा। उसने इन सैनिकों की वर्दी के बाएँ बाजू में बने चिह्न को अब देख लिया था जिस पर NSCN-K लिखा हुआ था।


     उनमें से एक व्यक्ति के पास लंबी दूरी का एक वॉकी-टॉकी था जिससे वह किसी से बात कर रहा था।


"वह जगह कितनी दूर है जहाँ से हमारे साथियों के रेडियो बंद हुए?"

"तुम इस समय जहाँ हो उसके पश्चिम में ५ किलोमीटर आगे रेडियो बंद हुए थे। कल रात को बहुत तेज वर्षा हो रही थी तो "लेफ्टिनेंट कर्नल जय" ज्यादा दूर नहीं गया होगा, वहीं आसपास ही कहीं होगा।"

"ठीक है हम जंगल के अंदर जा रहे हैं।"

     उनकी इस बातचीत से इतना तो पता चला कि यमदूत का नाम ले. कर्नल जय है। किंतु वह म्यामांर किस उद्देश्य से आया है यह अभी स्पष्ट होना शेष है।



      मोटर बोट के पास चार लोगों को छोड़कर बाकी के जंगल में अंदर चले गए। उन्हें जाता देख जय मुस्कुराने लगा, उसे सवारी जो मिल गई थी। झाड़ियों में धीरे-धीरे रेंगते हुए वह किनारे तक आ गया, इस दौरान उसने ध्यान रखा कि उन चारों को यह आभास न हो पाए कि झाड़ियों में कोई है।


        जमीन पर लेटे-लेते ही उसने चारों को निशाने पर लिया और एक लंबी साँस लेकर राइफल का ट्रिगर दबा दिया।

तड़sss…. तड़ss…. तड़ssss…… तड़sss……….

     राइफल ने गोलियाँ उगली और चारों व्यक्ति ढेर हो गए, उन्हें मारने के बाद जय ने साँस छोड़ी। इस बार उसने राइफल को फुल ऑटोमैटिक मोड में रखा था तो उसे बार-बार ट्रिगर दबाने की आवश्यकता नहीं पड़ी, उसने बस गोलियों को दिशा दिखाई और सबका काम तमाम।


    गोलियों की आवाज सुनकर वर्दीधारी लोग भागे-भागे किनारे की ओर वापस आए परंतु तब तक देर ही चुकी थी, जय उनका एक मोटरबोट लेकर भाग गया था और दूसरे के इंजन को उसने नष्ट कर दिया था। यह देख उनके लीडर को बहुत क्रोध आया।


"हमें बैकअप चाहिए, जय हमारी एक बोट लेकर चिन्द्विन नदी में उत्तर दिशा में भगा है।" वॉकी-टॉकी पर संदेश भेजते हुए उस व्यक्ति ने कहा।

"ठीक है मैं बैकअप भिजवाता हूँ", रेडियो पर बैठे व्यक्ति ने उत्तर दिया। फिर उसने अपने सुपीरियर को रेडियो संदेश भेजा।

उसका सुपीरियर मेजर इंगा; इस समय बहुत गुस्से में था, अपने ऑफिस में सहयोगियों को बुलाकर उनसे जय के बारे में पूछ रहा था।

" जय को पकड़ने गई टीम की अब तक कोई खबर क्यों नहीं आई?"

" सर लगता है वे सभी मारे गए हैं इसीलिए वापस नहीं लौटे।"

" एक निहत्थे आदमी को तुम लोग पकड़ नहीं पा रहे तो नागालैंड को भारत से अलग कैसे करोगे?"

    सभी कमांडर्स सिर झुकाकर इंगा की बात सुन रहे थे, उनमें से एक नए हिम्मत जुटाकर कहा, "सर इस बार हम अपने बेस्ट गुरिल्लाओं को भेजते हैं, जय इनसे नहीं बच पाएगा।"


"जो करना है करो; मुझे जय मरा हुआ चाहिए और उसके पास हमारे संगठन की जो जानकारी है वह नष्ट हो जानी चाहिए, अब जाओ।"


  सबको बाहर भेज कर मेजर इंगा अपनी कुर्सी पर बैठ गया, उसका गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ था।

    तभी उसके पीछे रखा रेडियो सेट बजने लगा, उसने रिसीव का बटन दबाकर हैंडसेट अपने कान से लगा लिया, "बोलो क्या बात है?"

" सर संगमा की टीम को ले. कर्नल जय का पता चल गया है, वह उनकी एक बोट लेकर चिन्द्विन नदी में उत्तर की ओर भागा है। उन्हें बैकअप चाहिए।" उसमें से आवाज आई, यह सुन कर वह प्रसन्न हो गया।

   रेडियो ऑपरेटर की बातें सुनने के बाद उसने अपने असिस्टेंट से कहा, " जाओ जाकर प्राइवेट न्याकपा को बुला लाओ।"

" जी सर "

  वह बाहर चला गया। जब वह वापस आया तो उसके साथ एक और व्यक्ति भी आया था। नए आए हुए व्यक्ति से इंगा ने कहा," न्याकपा, प्राइवेट संगमा की टीम को बैकअप चाहिए उन्होंने जय को खोज लिया है", फिर उसे एक कागज देते हुए कहा, "यह संगमा की लोकेशन है तुरंत अपनी टीम को लेकर वहाँ पहुँचो।"


    कागज में लिखा हुआ पढ़ने के बाद न्याकपा ने मेजर इंगा को सेल्यूट करते हुए कहा "समझ गया सर।"


     और तेज कदमों से बाहर की ओर चला गया। इंगा मुस्कुरा रहा था, वह यह सोच कर खुश हो रहा था कि न्याकपा और उसके आदमी जय को मारकर ही वापस लौटेंगे।

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    बोट के द्वारा जय अपने गंतव्य तक जल्दी पहुँच गया, अन्यथा पैदल चलने पर यही दूरी तय करने में चार-पाँच घंटे या उससे भी अधिक समय लग जाता।

      जय ने बोट को नदी किनारे लाकर उसे छिपा दिया ताकि उसका पीछा करने वालों को कोई सुराग न मिले। फिर वह जंगल के अंदर से होते हुए एक उजाड़ बस्ती में पहुँचा , देख कर ही लगता था कि यहाँ कोई नहीं रहता होगा। लकड़ी के बने घर जर्जर हो गए थे अंदर तरह-तरह की झाड़ियाँ उग आई थीं।


      इन घरों से अलग बस्ती के छोर पर एक घर था उन्हीं की तरह जर्जर; पर इसमें कुछ विशेष बात तो थी तभी तो जय इसके अंदर घुसा। 

  घर अंदर से भी दयनीय स्थिति में था किंतु इसे सौभाग्य ही कहेंगे कि वर्षों तक मौसम की मार झेलने के बाद भी यह अभी तक टिका हुआ था।

  घर के अंदर उसने एक कमरे में लकड़ी के बने फर्श को हटाया तो एक सीढ़ी दिखाई दी जो नीचे एक तहखाने तक जा रही थी।

    तहखाने के अंदर पहुँच कर उसने सबसे पहले एक एलईडी जलाई फिर वहाँ रखी एक अलमारी से उसने कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निकाले, जो थे एक टू वे रेडियो सेट; एक लॉन्ग रेंज एंटीना; एक माइक, इन सबको पावर बैकअप देने के लिए एक बैटरी और उसे चार्ज करने के लिए छोटा-सा डीजल जेनेरेटर।


  उसने सभी उपकरणों को एक साथ जोड़ा फिर एजेंसी के एन्क्रिप्टेड फ्रीक्वेंसी में अपने बेस ऑफ ऑपेरशन को संदेश भेजने लगा।

"रेड पांडा टू स्नो लेपर्ड कम इन ओवर?"

उसके संदेश के प्रत्युत्तर के रूप में बस घरघराने की आवाज आई

"घर्रर्र ……… रे ….घर्र …… "

कनेक्शन की जाँच करके एक बार फिर से उसने संदेश भेजा।

"रेड पांडा टू स्नो लेपर्ड डू यू रीड मी ओवर?"

इस बार कुछ तो आवाज आई

" आ.... ई … कांट …… घर्र … री … घर्रर्र …… यू … रे …. घर्र पांड ……… घर्रर्र ……"

"ओहो सब कुछ तो ठीक लग रहा है तो आवाज क्यों फट रही है!!"

जय ने फ्रीक्वेंसी की ट्यूनिंग करके एक बार फिर से संदेश भेजा।

"स्नो लेपर्ड तुम्हारी आवाज ठीक से नहीं आ रही है।"


रेडियो के दूसरे छोर पर यानी जहाँ जय संदेश भेज रहा था उसके बेस ऑफ ऑपेरशन में भी यही स्थिति थी

"स्नो … ले…. घर्रर्र …… तुम्हा..... घर्र आवा...ज ठीक... घर्र .... आ …… र....ही... घर्रर्र...."

"रेडियो को क्या हुआ है?" एजेंसी के लोकल यूनिट चीफ ने ऑपरेटर से पूछा।

"सर हमारे क्षेत्र में इस समय बहुत तेज बारिश हो रही है शायद इसीलिए हमारी कम्युनिकेशन लाइन्स में गड़बड़ी है। "

"तो ठीक करो इसे, जय से बात करना अति आवश्यक है वह जरूर किसी संकट में फँसा होगा तभी उसने संदेश भेजने में इतनी देर कर दी।"

"जय सर DIA के सबसे माहिर एजेंट हैं मुझे विश्वास है कि वे हर संकट से निकल जाएँगे।"

"हाँ पर इसका यह अर्थ नहीं कि उसे हमारी सहायता की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं, तुम रेडियो ठीक कर दो तब ही हम उसे शत्रुओं के बीच से सकुशल निकाल पाएँगे।"

"जी सर समझ गया अपनी टीम को ले जाकर मैं रेडियो लाइन्स ठीक करने का प्रयास करता हूँ।"

     बेस पर यूनिट चीफ जय के लिए परेशान हो रहे थे तो इधर जय भी बातचीत नहीं हो पाने के कारण चिंतित था। वह अपनी ओर से रेडियो को ठीक करने में लगा था तभी उसकी बैटरी मर गई।

    इस समस्या से निपटने का उपाय उसके पास था। उसने जनरेटर चालू कर दिया रेडियो की बैटरी फिर से चार्ज होने लगी, यह देख जय को कुछ राहत मिली।


  उसी समय चिन्द्विन नदी में मोटरबोट पर NSCN के तीस लड़ाके जय को खोजते हुए जा रहे थे। तभी न्याकपा को नदी किनारे कुछ दिखा, उसने अपने लोगों को कहा, "रुको, नदी किनारे बने वे चिह्न किसी बड़ी चीज को घसीटे जाने के लगते हैं, चलो जाकर देखते हैं।"

वे लोग उन चिह्नों के पीछे गए तो उन्हें एक मोटर बोट मिली।

"यह तो हमारी बोट है, मतलब जय आसपास ही है", संगमा ने कहा।

"जंगल का एक-एक कोना छान मारो और जय मिले तो उसे वहीं मार देना।" न्याकपा ने सबको आदेश देते हुए कहा।

  जंगल में खोजते हुए वे उस बस्ती तक पहुँच गए जहाँ जय का सेफ हाउस था।

"यहाँ बस चूहे मिलेंगे वापस चलो।" बस्ती के उजड़े हुए घरों को देखने के बाद न्याकपा ने कहा।

बहुत खोजने पर भी उन्हें जय का कोई सुराग मिला नहीं तो वे लौटने लगे थे तभी संगमा रुक गया।


"क्या हुआ संगमा रुक क्यों गए?" न्याकपा ने पूछा।


     तो संगमा ने बस्ती के अंतिम में बने घर की ओर संकेत करते हुए कहा, "उस घर को देखो उसकी हालत अन्य घरों से थोड़ी ठीक लग रही है, क्या पता कोई रहता हो वहाँ!"


"ठीक कहते हो, चलो चल कर देखते हैं।" न्याकपा उसकी बात से सहमत हो गया था।


  अपने आदमियों को साथ लेकर धीरे-धीरे संगमा और न्याकपा जय के सेफ हाउस की ओर बढ़ने लगे। एक बार फिर से वह संकट में पड़ने वाला था और इस बार ये लोग उसे पकड़कर अपने कैम्प ले जाएँगे ऐसा तो होगा नहीं।
कहानी जारी है, बने रहिए मेरे साथ। मिलते हैं अगले भाग में ……….