शापित हैं,आज सभ्यता उन स्थानों में पनपने से डरती है,एक अनजाना डर उन स्थानों पर जाने से लगता है।
आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही शापित जगहें,जिनके बारे में पीढ़ी दर पीढ़ी हमें कहानियां ही सुनाई जाती हैं।
कुछ अजीब,अनसुलझी ,भूतिया।
कुलधरा
जैसलमेर को 12 वीं सदी में राजा जैसल ने बसाया था ।
यहां से 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है कुलधरा गांव।
पर्यटक यहां बड़ी तादाद में रेगिस्तान के बीच बसे इस गांव को देखने आते हैं।
अब आप सोचेंगे ऐसी क्या खास बात है ,इस गांव में।
यह गांव वीरान,खंडहर है,इसके बारे में कहा जाता है कि यहां रात में रुकना मना है,और कोई यहां से कुछ ले भी नहीं जा सकता ,उसकी या तो मौत हो जाती है ,या तो उसकी जिंदगी में बुरे वक्त का आगाज हो जाता है।
1993 में यह गांव रेत में दबा पाया गया।इतिहासकार,स्थानीय लोग सबकी अपनी अपनी कहानी है।
ज्यादातर इस गांव के बारे में एक कथा प्रचलित है। करीब 300 साल पहले जैसलमेर में एक कमजोर राजा का राज्य था। राज्य की सत्ता वहां के दीवान सालेम सिंह के हाथों में थी।
सालेम सिंह बहुत ही क्रूर था ।
कुलधरा एक संपन्न गांव था,इस गांव का वास्तु शिल्प हड़प्पा ,और मोहनजोदड़ो से मिलता जुलता है। पाली स्थान से आए पालीवाल ब्राह्मणों ने इसे बसाया था । यह गांव काफी समृद्ध था। वे व्यापार,शिल्प,अनेक विधाओं में पारंगत थे।
उस गांव से ही सटे पालीवालों के 18 गांव और भी थे।
दीवान सालेम सिंह की बुरी नजर पालीवालोंं के घर की बेटी 12 साल की शक्ति मैया पर पड़ गई ।
उसने जिद की कि शादी के लायक होते ही वह उससे शादी करेगा ,अन्यथा उठा कर ले जाएगा।
पालीवालों को ये बात नागवार लगी ,उन्होंने गैर ब्राह्मण से अपनी बेटी की शादी को सिरे से नकार दिया।
जिससे गुस्साए सालेम सिंह ने गांव वालों पर कहर बरसाना शुरू किया।
एक रात सभी पालीवालों ने आपस में मंत्रणा कर रातो रात अपना सबकुछ संपत्ति,मवेशी, छोड़ गांव से कहीं चले गए।
वे कहां चले गए ,ये पहेली आज भी अनबूझ है। 200 से 400 लोगों का परिवार आखिर एक रात में कहां जा सकता था।
जाते जाते उन्होंने शाप दिया कि ,अब यहां कोई बस्ती आबाद नहीं हो पाएगी ,यह सालों साल खंडहर बन रेत में दफन हो जाएगा।
और आज यहां का वीराना टूटे फूटे ख्वाबों तले का सन्नाटा ,रूठी उदासी जो कुछ बोलना चाहती है।हवा भी सहमी सी फिर कुछ डरावनी हो जाती है।यह शापित वीराना गांव,पर्यटकों के आश्चर्य का केंद्र बना हुआ है।

0 टिप्पणियाँ