खोना नहीं चाहती थीं जिस ख्यालों में
खोगयी इस कदर की कुछ होश न रहा
जाने कहाँ से आयी ये बादल उड़ कर
मुझे पता भी न चला और ये बुँदे मुझे भीगो गयीं.....!!
जाने क्या मंसूब है उस आंस्मा की बादल का
जो कयी दिनों बाद ऐसा बौछार है बरसा रहा
जाने क्या सबब हुआ की आगयी दिल की बातो में
मुझे पता भी न चला और बुँदे मुझे भीगो गयी.....!!
मैं क्या समझू इस बारिश की इशारो को
बहुत जलन सी इसकी बूंदो में महसूस होरहा
जो कभी न हुआ जो कर गयीं एक पल में कैसे
मुझे पता भी न चला और ये बुँदे मुझे भीगो गयी.....!!
चूर है कलिया अपनी खुशबू की मस्ती में
घुल रही है साँसो में जैसे अनकही अहसास जैसे
ले जारही है हवा जाने कहाँ मेरा दिल चुरा कर जो
मुझे पता भी न चला और ये बुँदे मुझे भीगो गयी.....!!
कुछ बेफिक्र सा दिल है और कुछ डरता भी है
कुछ रोकती हूँ अहसासे दिल की और कुछ दिल बहकता भी है
जाने किस ज़ालिम दिल के मुकम्मल हुआ साज़िश की
मुझे पता भी न चला और ये बुँदे नैना को भीगो गयी.....!!
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नैना... ✍️✍️💓

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