पीहू असहाय सी उन दोनो को देख रही थी और वो दोनो हँस रहे थे,पीहू की निर्बलता पर,उसके भोलेपन पर और उसकी सादकी पर!जिस पति को हर औरत भगवान के समान समझती है आज पीहू के लिए उसका पति उसका भगवान ही शैतान बन गया।जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो एक औरत कहाँ जाए?
अब पीहू नीरज से कहती है तू ये ना समझ कि तू जीत गया,ईश्वर के घर मे देर है पर अंधेर नही।उसकी शक्ति के सामने तेरी शक्ति कुछ भी नही है।
अच्छा,तेरा भगवान अब क्या करेगा?कैसे रोकेगा मेरे बच्चे को इस दुनिया मे आने से?क्या है कोई जवाब तेरे पास?नीरज अहंकार में बोले ही जा रहा था!अब तू यहीं रहेगी इस कमरे में जबतक मेरा बच्चा मुझे नही नही सौंप देती ,ये कहकर नीरज बाहर चला जाता है और पीहू वहीं हारी हुई सी बैठी हुई है।
तभी छाया मुस्कुराती हुई पीहू के पास आती है और कहती है क्या हुआ पीहू?आज अपने पति परमेश्वर से ही हार गई तुम?
पीहू कुछ नही कहती और खामोश सी बैठी रहती है।तब छाया फिर से बोलती है कि आज तुम सब कुछ हार गई पीहू,अपना पति ,अपना बच्चा और कुछ ही समय बाद अपनी जान भी!ये कहकर छाया हँसने लगती हैं और हँसते-हँसते उसकी सूरत ओर भी भयानक लग रही है।
अब पीहू गुस्से में कहती है कौनसा पति,कौनसा बच्चा???एक शैतान को मैं अपना पति नही मानती और ये बच्चा तो मेरा कभी था ही नही तो इसका क्या दुख मनाऊँ मैं?नही चाहिए मुझे ऐसा पति या ऐसा बच्चा।
अब छाया गुस्से में वहां से चली जाती है और पीहू भी खामोश सी बैठ जाती है।
दूसरी ओर,कौशल्या,गुरु जी और स्वामी केशवदास जी अपने शिष्यों के साथ एक गाड़ी में चल पड़ते हैं।रास्ते मे कौशल्या से अब रहा नही जाता तो वो स्वामी केशवदास से सारी सच्चाई पूछती है,वो कहती है स्वामी जी मुझे सच-सच सारी सच्चाई बताइये?
अब केशवदास जी कहते हैं पुत्री क्या सुन सकोगी सारी सच्चाई?
जी,आप मुझे सच बताइये,मैं सब सुनने को तैयार हूँ।कौशल्या हिम्मत करके कहती है।
अब स्वामी केशवदास जी उसे नीरज का सारा सच बता देते हैं और कहते हैं नीरज खुद उस चुड़ैल छाया के साथ मिला हुआ है।
लेकिन कौशल्या को ये बिल्कुल विश्वास नही होता कि उसका खुद का खून भी ऐसा नीच काम कर सकता है।तब केशवदास जी कहते हैं पुत्री मैंने जब ध्यान लगाया था तो स्वयं ही उसे उस चुड़ैल के साथ देखा था।मेरा केवल शरीर ही यहाँ था लेकिन आत्मा खुद जाकर पीहू को देख आई थी!भरोसा करो मुझपर।
कौशल्या को ये सब जानकर बहुत दुख होता है और वो अब खुद को मजबूत करके कहती है मैं अपनी बेटी पीहू के साथ हूँ।
अब वो उस जगह पर पहुँच जाते हैं जहाँ पर गुरुजी ने पीहू को देखा था लेकिन ये क्या ये जगह तो बिल्कुल भूलभुलैया लग रही है सभी को!यहाँ बहुत सारे घर है जो देखने मे बिल्कुल एक जैसे है।जब स्वामी जी ध्यान लगाकर यहाँ आए थे तो उन्होंने घर पर हरे रँग का पेंट देखा था लेकिन अब कैसे पता चलेगा क्योकि हर घर का पेंट एक ही रँग का है।
यहाँ कई घर है और सभी का रँग भी बिल्कुल ऐसा ही है ऐसे में पीहू जिस घर मे कैद है वहाँ तक कैसे पहुँचा जा सकता है?ये एक कठिन कार्य था!अब सस्वामी केशवदास जी ने कहा की चाहे कुछ ही हो जाए हमे पता लगाना ही होगा ये कहकर वो आगे बढ़ चले!अब उन्होंने एक-एक घर के करीब जाना और उस घर मे चोरी से जाकर देखना की इसमे कौन रहता है ऐसा करना शुरू किया,जिसमे बहुत समय लग गया।अब काफी मेहनत के बाद वो एक ऐसे घर के बाहर आये जो काफा उजाड़ से प्रतीत हो रहा था!उस घर के बाहर कुत्ते रो रहे थे!केशवदास समझ गए कि हो न हो यही वो घर होगा जिसमे पीहू को छुपाया हुआ है।ये सोचकर वो सभी उस घर की ओर बढ़ गए और सीधे जाकर दरवाजा खटकाया!पहले तो काफी देर तक दरवाजा किसी ने नही खोला किंतु बाद में दरवाजा खुलता है तो देखता है कि सामने सभी खड़े हैं!नीरज को जरा भी उम्मीद नही थी कि दरवाजे पर कौशल्या और बाकी सभी होंगे।पहले तो वो घबराकर दरवाजा बंद करने लगता है लेकिन वो सभी उसे धक्का देकर अंदर आ जाते हैं।नीरज उन्हें रोकने की काफी कोशिश करता है लेकिन असफल रहता है।अब कौशल्या आगे आती है और नीरज को जोर से थप्पड़ मारती है और पूछती है कहाँ है पीहू?
इससे पहले कि नीरज कुछ कहता घर का दरवाजा अंदर से बन्द हो जाता है,बिजली चमकने लगती है और उल्लुओं की तरह-तरह की आवाजें आने लगती है।अब उस खूबसूरत शैतानी शीशे में से छाया बहुत ही भयंकर रूप में निकल कर सामने आती है।रूप इतना भयानक होता है जिसे देख कर किसी की भी रूह काँप जाए।
अब छाया अपने सबसे भयंकर रुप में थी जिसे देख कर कोई भी दे जाए।आँखों से खून टपक रहा था।
ॐ नमः शिवाय
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