हृदय उल्लसित हो जाता है रिमझिम बरसात में
अंतर्मन छू जाता है प्रकृति की अनुपम सौगात में

सिहर उठती है पत्तियां ,मधुर स्पर्श उनका पाकर
प्रमुदित हो उठती हैं वो सब अपार हर्ष में आकर

झर झर गिरती बूंदे और झूम उठा है हर उपवन
बरखा में मेरा तन मन भीगे, भीगे मेरा घर आंगन

हरित वृक्षों की देख मुस्कान, मुग्ध हो रहा है मानव 
देख धरा की हरियाली, गुनगुना रहे हैं नवपल्लव