एक अभियान डिप्रेशन के विरुद्ध
हे डिप्रेशन के अवसाद 
तूने कैसे रंग दिखाए ,
बड़ा ना छोटा देखा तूने
कितने घर है तोड़ दिखाएं।

तेरे चक्कर में ना जाने 
कितने चक्कर खाते हैं,
 सोच सोच कर समझ ना पाते 
क्यों हम हंस नहीं पाते हैं।

क्यों लगता है सूरज डूबा 
अब ना कभी उग पाएगा ,
क्यों लगता है मन का बोझ
 कभी खत्म ना हो पाएगा।

हे डिप्रेशन हे अवसाद 
करवाना है तेरा इलाज,
 अच्छे भले घरों में अब 
रह ना पाए तेरा राज।

आओ एक-एक कदम बढ़ाए
 अवसाद की व्यथा को समझें और समझाएं ,
शायद हमारी एक छोटी पहल से 
किसी की कीमती जिंदगी बच जाए।
स्वरचित सीमा कौशल यमुनानगर हरियाणा