छोड़ उम्मीदें हर किसी से
अब मुस्कुराना सीख लिया
खुद में ढूंढ खुद का वजूद
अब मैंने जीना सीख लिया

सब स्वार्थ से साथ निभाते
जख्मों पर नमक छिड़कते
पर अब खुद के जख्मों पर
 मरहम लगाना सीख लिया

कौन है जिसे है  कमीं नहीं 
आसमाँ के पास भी जमीं नहीं
दूरी में भी अपनापन के 
अहसास को गले लगाना सीख लिया...
                       नेहा शर्मा