तुम्हारे प्रेम में  हम दिल लगाना सीख गए हैं।
गमों के बीच भी  हम मुस्कुराना सीख गए हैं।।

हमेशा चुप ही रहते थे हम  अक्सर महफिलों में भी।
मगर तन्हाइयों में भी बात करना सीख गए हैं।।

बहस करने की आदत है नहीं हमको किसी से भी,
हम  अब अपना ही रास्ता बदलना सीख गए हैं।।

दोस्तों को शिकायत है हम बदल गए हैं शायद।
इसीलिए सबसे नजरें चुराना सिख गए हैं।।

राज दफ़न कर दिया सीने में सारे।
गहरे ज़ख्म छुपाना सीख गए हैं।।

इज्ज़त पाने की आरजू नहीं हमारी।
हम नजर-अंदाज करना सीख गए हैं।।"

        अम्बिका झा ✍️