हरेक सख्स को है प्यार आपने नगमों से
यहां किसी के लिए वाह कौम कहता हैं
वो शख्स जिसकी गुमा है कि वो बेहतर है
अकेला कांच के घर मे ही बंद रहता है

कोई कहे मैं बाए हाथ से से ही लिखुगा
मेरे सफो पे तो मजदूर या किंसा होगें
मुझे तो भूख या गर्दिश से सिर्फ निस्बत है
जहां के दर्द मेरे हर्फ़ में आया होगे।

कोई है और भी जो प्रेम का पुजारी है
काहे कि चाह में उसकी सदा मैं गाऊँगा
मेरा हबीब ही मेरा खुदा है सब जाने
उसी के यादो में दिन रात मैं बिताऊँगा।

किसी को प्यार है कुदरत के हर नजारे से
जमी से,चांद से,सूरज से,हर सितारे से
कलम से उसके नई बात जब निकलती है
मचल के मिलती है हर मौज तब किनारे से।

की मैं ही मैं हु,चलो सोच एसी दफन करें
हरेक को दाद मिले और कोई बात बने
फिदा जो आपने पे होना जमारा छूटे तो
विवाद खत्म हो, और अदमी की जात बने।।
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