उड़ गई पंख पसार चिरैया मोरी उड़ गई पंख पसार। 
अँगना ने आबे दाना ने खाबे मैं तो ठाँड़ी रही लाचार।। 
मुड़ के न हेरी मोसे ने बोली मैं बैठी अँचरा पसार। 
ने मुसक्यानी ने रिसियानी बातो उड़ गई पंख पसार।। 
अँसुवा बहा रई औ  डकरा रई सुनी ने कोनऊ  गुहार। 
कैसो असगुन अँगना मा छाओ छाँड़ो चिरैया ने आबो जाबो की सों कहौं मैं पुकार।। 
सोन चिरैया मोरी उड़ गई पंख पसार। 
स्वरचित मौलिक सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर