गाँधी ने कहा था--- 
पाप से घृणा करो
पापी से नहीं...

पाप को तज दो
पापी को नहीं...

हमने उनका दर्शन मान लिया,
पाप को तजा न तजा
पापी को गले लगा लिया.....

गले ही नहीं,
 मंचो पर चढ़ाया, 
सम्मान किया.....

किसी ने की चरित्र हीनता, किसी ने भ्रष्टाचार किया....
किसी ने की बेईमानी,
किसी ने देश द्रोह किया....

पर हमने इनके पापों से, आंखों को फेर लिया....
गांधी के दर्शन में  भी,
थोड़ा उलट फेर किया....

जो जितना गिरता गया,
उसको उतना मान दिया....

गांधी के दर्शन को पूरा न सही,
आधा तो हमने अपना ही लिया ....

पाप को छोड़ा न छोड़ा,
पापी को गले लगा ही लिया....

क्या हुआ जो सड़कें टूट रहीं,
नेताओं की अट्टालिकाएँ तो खड़ी हैं....
क्या हुआ जो गांवों में बिजली नहीं,
कर्णधारों के महलों में
रोशनी की लड़ी है ....
क्या हुआ जो माननीयों का चरित्र बिक गया,
इन चरित्रहीनों के पुजारियों की भीड़ बड़ी है....
क्या हुआ जो कीमती ईमान बिक गया,
बेईमानों के भक्तों की लाइन बड़ी है...

क्या हुआ जो देश बेचा जा रहा,
देश द्रोहियों के अफसाने बड़े हैं....
क्या हुआ जो देश बंट रहा,
 बंटने खुद वोटर  कदमों पड़े हैं....

क्या हुआ जो देश का कर्ज बढ़ रहा,
मुफ्तखोर  झोली फैलाए  खड़े हैं....

पूछती है अर्चना ये सवाल
है .....
कोई माई का लाल????
जो गाँधी सिद्धांत को
आज के सांचे में सके ढाल ????
जो पाप को ही नहीं 
पापी को भी सके समूल निकाल????

क्यों पड़ गया आज
ऐसे नेताओं का अकाल????
अरे स्वार्थी वोटर
अब तो  इन पापियों को निकाल.......
अर्चना जैन मण्डला