टूटे दिलों को सहारा देने वालो की, कमी नहीं है
खिलते फूलों को मुर्झाने वालों की, कमी नहीं है
हँसकर, रुलाने वालों की, कमी नहीं है और
रोकर हँसाने वालो की, कमी नहीं है
ये दुनिया इंसानो की ही नहीं, औरों की भी है
यहाँ एक-के-बाद एक, आने-जाने की कमी नहीं है
दूर पत्थर टूट कर बिखड़ते है तो
उसे बसाने वालों की, कमी नहीं है
जब अंधाधुन टपकती रह्ती है, बूँद बारीशों कि
तो उसे इस्तेमाल करने वालों की, कमी नहीं है
कभी अचानक थक कर, जब बैठ जाता है कोई
तो उसे सुस्ताने वालों की, कमी नहीं है
जब माँगता है कोई दिल खोल कर कुछ
तो उसे पूरा करने वालों की, कमी नहीं है
जब जोर लगाता है कोई, कुछ करने की
तो उसे सहारा देने वालों की, कमी नहीं है
जब लिखता है कोई लफ्ज़, अपने दिल की
तो उसे पढ़ने वालों की, कमी नहीं है
जब कोई सुनाता है दर्द अपने दिल कि, तो
उसे समझने वालों की, कमी नहीं है
जब-जब जुल्म होती है इस दुनियाँ मे
तो उसे मिटाने वालों की, कमी नहीं है
जब करता है पुकार कोइ, सच्चे मन से
तो उसे सुनने वालों की, कमी नहीं है
दुःख, मुसीबतें, गम, दर्द-ख़ुशी
और न जाने क्या-क्या है, यँहा
कयूंकि, ये दुनिया मिलावटी है यारों
यँहा डुप्लीकेशन की, कमी नहीं है
✍️✍️✍️प्रितम वर्मा✍️✍️💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖

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