आंखों से बहते आंसू लिखूं
दिल में छिपे दर्द के अफसाने लिखूं
गहरे है जख्म इतने मरहम लगा नहीं सकते
रुसवा किया इतना चाहकर भी भूला नहीं सकते
मांगी थी दो घड़ी तुझसे
कुछ हंसने का बहाना मिल जाता
किसी की डूबती नैया का सहारा बना होता
हजारों दुआएं देते तुम्हें जो किनारा मिला होता
अक्सर जो लोग कहा करते थे
हम किसी का दिल नहीं दुखाया करते
अनजाने वही कड़वी बातें किया करते हैं
निरपराधी किसी के मन को रुला दिया करते हैं।।
नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश

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