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सुबह से दिन  दिन से अब शाम आगयी
लेकिन पता नहीं कहा हो तुम
अभी तक आयी कोई खबर नहीं

सुबह की चाय ही दे पायी थीं
जाना है जरुरी बोल कर गले लगाए बगैर चले गए
कमसे कम मेरी माथे को ही चुम लिया होता 
भूल जाते हो क्यूँ हर बार तुम जब तक दिलाती याद नहीं...

जानती हूँ थोड़ी पागल हूँ
थोड़ी चंचल थोड़ी शरारती भी
पर ये भी पता है हमदम मेरी
जब तक तुझे तंग ना कर लू तुम्हे भी आती चैन नहीं

जीवन में स्तिथि कैसी भी आये
तेरी शाया बन तेरी हर कदम पर साथ रहूँगी
किया है वादा जो भी तुझसे
आख़री सांस तक मैं निभाउंगी
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नैना...✍️❤️

(काल्पनिक )