छाया अपने बहुत ही भयंकर रूप में उतर आई है और उसने उन सभी के चारो ओर अपने जादू का जाल बिछा रखा है।उसके बाल बिखरे हुए है और रँग भी भयानक काला हो चुका है।चारो ओर इतना गहरा अँधेरा किया है छाया ने कि दम भी घुटने लगे।कोई भी किसी को देख नही पा रहा है।छाया जोर-जोर से हँस रही है और किसी को भी उठा कर कही भी फैंक देती है!उसके प्रकोप ने गुरुजी के हर शिष्य को घायल कर दिया है!केवल वो गुरुजी और उनके गुरुजी स्वामी केशवदास जी को ही कुछ नही कह सकती है।अँधेरे की वजह से कौशल्या बहुत घबरा गई है और कहती है गुरुजी कुछ कीजिये।इससे पहले के गुरुजी कुछ कर पाते वो छाया कौशल्या को बालों से पकड़ कर उठा लेती है और कहती है तू ही मेरी हर मुसीबत की जड़ है।आज सबसे पहले तुझे ही खत्म करुँगी।
अब केशवदास जी अपने मन मे कुछ मन्त्र पढ़ते हैं,उनके मंत्रों की शक्तियों से चारो ओर रोशनी हो जाती है।अब सब कुछ साफ दिखाई देने लगता है।अब वो छाया को कहते हैं छोड़ दे कौशल्या को।
छाया अब हँसने लगती है और कहती है इस बुढ़िया को तो मैं किसी भी कीमत पर नही छोडूँगी।जब तक अब रोशनी में नीरज भी देखता है कि उसकी माँ को छाया ने पकड़ा हुआ है तो वो भी कहता है छाया माँ को छोड़ दो।
छाया नीरज की बात को टाल नही सकती है इसीलिए वो कौशल्या को छोड़ देती है और वो दौड़ कर गुरुजी के पास चली जाती है।अब गुरु जी स्वामी केशवदास को इशारा करते हैं।उन दोनों गुरु शिष्य में कुछ इशारों से ही बातें होती है।केशवदास अपने झोले में से एक पूजा का सिंदूर निकाल लेते हैं और उसे लेकर ज्यों ही छाया की ओर बढ़ते हैं तो वो वहाँ से गायब हो जाती है और केशवदास के पीछे आकर खड़ी हो जाती है।इससे पहले के वो कुछ समझ पाते छाया उन पर पीछे से वार करती है।वो अपनी आँखों से ही इतनी तेज हवा चलाती है कि केशवदास जी दूर जाकर गिरते हैं।
अब वो समंझ जाते हैं कि इसे काबू में करने के लिए मुझे मंत्रों का जाप करना होगा।
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रुं ह्रैं ॐ नमों भगवते महाबल पराक्रमाय भूत प्रेत पिशाच शाकिनी डाकिनी यक्षणी
पूतना मारी महामारी ,यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षासादिकम हन हन भंजय भंजय मारय मारय शिक्षय शिक्षय महमरेश्वरम रुद्रावतार हुं फट स्वाहा
जैसे-जैसे केशवदास इस शक्तिशाली मन्त्र का जाप कर रहा था,वैसे-वैसे छाया की शक्तियाँ कमजोर पड़ रही थी!वो अब तड़पने लगी है और एक ही स्थान पर गिर जाती है।अब वो घुटनो के बल बैठकर तड़प रही है।नीरज देखता है की छाया मुसीबत में है तो वो दौड़ता हुआ आता है और केशवदास को जोर से धक्का देता है,अचानक से दिए हुए धक्के की वजह से केशवदास दूर जाकर गिरता है और मन्त्र बीच मे ही टूट जाते हैं।अब मन्त्र टूटने से छाया फिर से खड़ी हो जाती है और जोर-जोर से हँसने लगती है।
केशवदास जैसे ही खड़ा होने लगता है छाया उसे बालों से खींचते हुए ले जाती है और बालों से पकड़ कर उठाती है।अब वो उसे जोर-जोर से घुमाती हैं और हंसते हुए दूर को फैंकती है।केशवदास का सिर जाकर दीवार पर लगता है जिससे वो बेहोश हो जाता है।दूसरी ओर,गुरुजी जिन्हें केशवदास ने इशारा किया था वो सारे घर मे पीहू को ढूँढ रहे है।घर बहुत बड़ा है जिसमे कई कमरे हैं।वो एक-एक करके सारे कमरों में देखना शुरू कर देते हैं।उनके कुछ शिष्य भी देख रहे हैं।लेकिन पीहू का कुछ भी पता नही चल पा रहा है।गुरुजी अब एक कमरे में जाते हैं जो को बहुत ही विशाल है।पहले तो उन्हें उस कमरे में कुछ नही दिखाई देता है लेकिन जब वो वापिस आने लगते हैं कि तभी उनकी नजर अलमारी के साथ एक छोटे से दरवाजे पर जाती है,जो कि पूरा अलमारी जैसा होने की वजह से पता ही नही चल पाता है किसीको।अब गुरुजी धीरे-धीरे उस दरवाजे की ओर बढ़ते हैं और वो दरवाजा खोलते हैं तो उसमें एक कमरा ओर होता है।वो अब उस कमरे में प्रवेश करते हैं जो बिल्कुल खाली है,उन्हें कुछ समझ नही आ रहा है कि तभी उनकी कानो में पीहू की आवाज पड़ती है,जो कि चिल्ला रही है-गुरुजी मैं यहाँ हूँ।
लेकिन गुरुजी चारो ओर देखते हैं तो उन्हें कुछ भी दिखाई नही देता है!वो मुड़कर वापिस जाने लगते हैं तो फिर से आवाज आती है गुरुजी देखिए मुझे,मत जाइए वापिस!मेरी मदद कीजिये।
छाया के फैलाये हुए मायावी जाल से अब गुरुजी भी चकरा चुके हैं।उन्हें कुछ समझ नही आता है तो वो गायत्री मंत्र पढ़ना शुरू कर देते हैं।अब मंत्रों की शक्ति से छाया के जादू का प्रभाव कम होने लगता है तो उनकी नजर उसी खूबसूरत शीशे पर जाती है।वो महसूस करते हैं कि पीहू की आवाज उसी शीशे में से आ रही है।वो धीरे-धीरे उसी शीशे की ओर बढ़ते हैं और जो देखते हैं वो देखकर उनका सिर चकरा जाता है!पीहू की आत्मा अब उस खूबसूरत शीशे में कैद हो चुका है।लेकिन ये कैसे हो सकता है?यही सोच-सोच कर उनका दिमाग चकरा रहा है।वो तो ये सोचकर आए थे कि इस शीशे को आज नष्ट कर देंगे लेकिन अब वो कैसे नष्ट होगा क्योंकि उसमें अब छाया नही पीहू की आत्मा कैद है।खूबसूरत शैतानी शीशे ने अपना रँग ही बदल लिया है।लेकिन ये कैसे हो सकता है?अगर पीहू की आत्मा यहाँ है तो उसका शरीर कहाँ है???????
ॐ नमः शिवाय
🙏🙏🙏🙏🙏


0 टिप्पणियाँ