अयोध्या के राम मंदिर की नींव के 200 मीटर की गहराई में जब टाइम कैप्सूल डाला गया तो एक सवाल सबके जेहन में उभरा,क्या है ये टाइम कैप्सूल?
टाइम कैप्सूल दुनिया के लिए नया नहीं है।सबसे पुराना 30 नवंबर 2017 में स्पेन के बारगोश में मिला था ,यह करीब 400 साल पुराना है।
टाइम कैप्सूल एक कंटेनर की तरह होता है,जिसे विशेष प्रकार के तांबे से बनाया जाता है,इसकी लंबाई 3 फुट होती हुई ।
तांबे की ये विशेषता होती है कि ये सैकड़ों हजारों साल भी जमीन से निकाले के बाद भी सुरक्षित रहते हैं।
टाइम कैप्सूल को किसी इमारत में डालने का मकसद किसी समाज,काल या देश के इतिहास को सुरक्षित रखना होता है।इससे सभ्यता के नष्ट होने पर भविष्य में आगामी पीढ़ी को उस खास युग ,के समाज ,और देश के बारे में जानने में मदद मिलती है।
प्राचीन इमारतों के नष्ट हो जाने के बाद भी टाइम कैप्सूल के द्वारा उसका इतिहास पता लग सकता है ,जिससे विवादों से भी बचा जा सकता है।
टाइम कैप्सूल के इस कंटेनर में महत्वपूर्ण दस्तावेज रख दिए जाते हैं।
भारत में लाल किले में ,कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय,गुजरात के महात्मा गांधी मंदिर में डाला गया है।
फरवरी 2010 में आईआईटी कानपुर के स्वर्ण जयंती के अवसर पर प्रतिभा पाटिल द्वारा एक टाइम कैप्सूल डलवाया गया था।

0 टिप्पणियाँ