हमारे देश की रक्षा का कार्य सैन्य बल बहुत वीरता के साथ करते हैं। भारतीय सेना के तीन महत्वपूर्ण अंग हैं – जलसेना,थलसेना और वायुसेना।
भारतीय वायुसेना सशस्त्र सेना का वह विभाग है जो वायु युद्ध,वायु सुरक्षा एवं वायु चौकसी का महत्वपूर्ण कार्य देश के लिए करती है।इसकी स्थापना  8 अक्टूबर,1932 को
रॉयल इंडियन एयरफोर्स के नाम से की गई थी।इसकी एयरक्राफ्ट ने अपनी पहली उड़ान 1 अप्रेल 1933 को भरी थी। 1945 के द्वितीय विश्वयुद्ध में इस सेना ने महान भूमिका निभाई थी।
स्वतंत्रता के बाद इसमें से रॉयल शब्द हटाकर इसका नाम सिर्फ "इंडियन एयरफोर्स" कर दिया गया।
आज वायुसेना का गौरवशाली 89वां स्थापना दिवस है।यह गर्व की बात है कि भारतीय वायुसेना को विश्व की सबसे ताकतवर सेनाओं में चौथा स्थान प्राप्त है।
देश के आज़ाद होने के बाद से भारतीय वायुसेना 4 युद्ध में शामिल हो चुकी है ,जिनमे तीन पाकिस्तान और एक चीन के खिलाफ लड़े गए।भारतीय वायुसेना के अन्य प्रमुख ऑपरेशनों में ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन कैक्टस, ऑपरेशन पुमलाई, बालाकोट एयर स्ट्राइक शामिल हैं।इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना में भी भारतीय वायुसेना ने अविस्मरणीय योगदान दिया है।
युद्ध और शांति दोनों ही अवस्थाओं में वायुसेना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य है– नभः स्पृशं दीप्तम।
1948 में गठित हिंदुस्तान ऐयरोनॉटिक्स लिमिटेड वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी रक्षा फर्म है।भारतीय वायुसेना में लगभग 170000 कर्मियों और 1400 से अधिक विमानों की ताकत है।
आज हमारी वायुसेना के प्रमुख विमानों में मिग-21, मिग-27,जगुआर, मिराज-2000 और मिग-29 का आधुनिकीकरण किया गया है।इसी प्रकार हेलीकॉप्टरों को भी आधुनिक किया जा रहा है।और इस वर्ष तो लड़ाकू विमान राफेल भी हमारी सेना का एक हिस्सा बनी है।जो हमारी नवीनतम उपलब्धि है।विभिन्न प्रकार के राडार और नये हथियार तथा युद्ध में विजयी होने के लिये नेटवर्क सम्बन्धी प्रणालियां विकसित की गई हैं।महिला सैनिकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
वायुसेना के वीर योद्धा न सिर्फ आसमान को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि आपदा के समय मानवता की सेवा  में भी अपना योगदान देते हैं।
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(गूगल से साभार)