एक अरसे से तुफान लेकर चले थे हम
आंधियो की क्या औकात हमें हिला दिया होता
ना इश्क़ मेरा कम था ना उसका बस
इन्तजार ओर इजहार मे ना लम्हा गवां दिया होता
दिल पर पत्थर तो हम भी रख लेते गर
कभी इतना एतबार भी हम पर रख लिया होता
अकीदत में कमी ना थी मेरी ईश्वर माना
बेआबरू करके काश उसने रूसवा ना किया होता
कृष्णा की✍️ कलम से

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