हुस्न का सदियों से यही दस्तूर रहा है 

सौंदर्य के अहंकार में चकनाचूर रहा है 

इश्क तो करता रहा है हुस्न की भरपूर बंदगी 

मगर उनकी मेहरबानियों से सदा दूर रहा है 


हरिशंकर गोयल "हरि"