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ज़ब भी तेरे ख्याल दिल से गुजर ती है
आँखों में हया और होठों पर मुश्कान होती है
अब तक नहीं समझ पाये जानेजाना मेरी
तुम्ही बतादो तेरे मोहब्बत में इतना नशा क्यूँ होती है....!!

क्यूँ तुझमे ही हम खोये रहते है हर पल
ये कैसा खुमारी है इश्क़ की ए दिल हम पर
एक बार जो आँखे मिली होकर रह गए हम तुम्हारे
तुम्ही बतादो तेरे मोहब्बत में इतना नशा क्यूँ होती है....!!

तुम पास नहीं मेरे पर तुम्हे खुद में महसूस करती हूँ
तुम क्या जानो सनम मेरी तुम पे कितना मरती हूँ
जीने की ख्वाहिश तुमसे ही क्यूँ होने लगी इस दिल को
तुम्ही बतादो तेरे मोहब्बत में इतना नशा क्यूँ होती है....!!

कोई ख्वाब नहीं अब मेरे इन आँखों तेरे चाहत के सिवा
क्यूँ कोई नहीं लगता अपना इस दिल को सनम तेरे सिवा
जो कभी सोचा नहीं था ऐसी लगी होगयी तुमसे हमें
तुम्ही बतादो तेरे मोहब्बत में इतना नशा क्यूँ होती है....!!

जाने कब से ये दिल का रोग ले बैठे है खबर न हुआ
लगता है मिट जाऊगी ज़िन्दगी में जो तू मेरा न हुआ
क्यूँ करती है नैना इतनी बेइम्तेहा मोहब्बत तुमसे ओ ज़ालिम
तुम्ही बतादो तेरे मोहब्बत में इतना नशा क्यूँ होती है....!!
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नैना.... ✍️✍️✍️
काल्पनिक.....