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हैअद्भुत छटा निराली ,हर घर में है दिवाली !
अमावस की काली रात में ,दीये जगमगा रहे हैं !!
माता सिया के संग में,प्रभु राम आ रहे हैं ...
अमावस की काली रात में दीये जगमगा रहे हैं ...
भगवान आ रहे हैं ,श्री राम आ रहे हैं......
वन मैं चौदह बरस बिताया, पिता का वचन निभाया !
मातृभूमि का ऋण चुकाने, करूणानिधान आ रहें हैं .....
भाई लक्ष्मण के संग में, प्रभु राम आ रहे हैं ....
अमावस की काली रात में दीये जगमगा रहे हैं
भगवान आ रहे हैं , श्री राम आ रहे हैं.............
दशानन को जिसने मारा , सबरी को जिसने तारा !
शरणागत ,रक्षक ,पालक सबसे मित्रता निभा रहे हैं !
बजरंगबली के संग में , प्रभु राम आ रहे हैं ....
अमावस की काली रात में दीये जगमगा रहे हैं
भगवान आ रहे हैं , श्री राम आ रहें हैं ..............
राजसिंहासन का त्याग कर के, योगी का वेश धर के !
जीवन के संघर्षों में जीना स्वयं सिखा रहे हैं !!
मर्यादा पुरुषोत्तम ,प्रभु राम आ रहे हैं......
अमावस की काली रात में दीये जगमगा रहे हैं...
भगवान आ रहे हैं , श्री राम आ रहे हैं.......
........ पिंकी मिश्रा
भागलपुर बिहार

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